Jharkhand Vidhansabha: झारखंड विधानसभा बजट सत्र के सातवें दिन जनजातीय उप-योजना (Tribal Sub Plan - TSP) के फंड के डायवर्जन (विचलन) का मुद्दा गरमाया रहा. खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने सदन में इस विषय को उठाते हुए सरकार की घेराबंदी की और आदिवासियों के विकास के लिए निर्धारित राशि के अन्य मदों में खर्च होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की.
विधायक का सवाल: टीएसपी की राशि के साथ क्यों हो रहा छलावा?
विधायक राजेश कच्छप ने सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या राज्य अपने बजट से टीएसपी को पर्याप्त राशि दे रहा है? उन्होंने यह भी पूछा कि आदिवासियों के कल्याण के लिए आवंटित धन का उपयोग दूसरे कार्यों में क्यों किया जा रहा है और इस विचलन को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा है. उनके पूरक सवाल में इस बात पर जोर था कि अब तक हुए फंड विचलन के लिए कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं और क्या सरकार उन पर दंडात्मक कार्रवाई करेगी?
मंत्री चमरा लिंडा की स्वीकारोक्ति: अभी तक नहीं है कोई स्पष्ट नियमावली
सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री चमरा लिंडा ने स्वीकार किया कि केंद्र सरकार से आबादी के अनुपात में टीएसपी फंड प्राप्त होता है, लेकिन राज्य में इस राशि के खर्च और विचलन को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस गाइडलाइन नहीं बनाई गई है. उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि इस समस्या का समाधान निकालना सरकार की प्राथमिकता है और जल्द ही इस दिशा में नियमावली तैयार करने पर काम शुरू किया जाएगा. मंत्री ने कहा कि पूरे मामले का विस्तृत अध्ययन करने के बाद ही दोषियों पर विचार किया जाएगा.
विधानसभा अध्यक्ष का सुझाव: अन्य राज्यों के मॉडल का करें अध्ययन
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार को उन राज्यों की गाइडलाइन और मॉडल्स का अध्ययन करना चाहिए जहां टीएसपी फंड के खर्च की पारदर्शी व्यवस्था है. इसके आधार पर ही राज्य में एक सशक्त नियमावली बनाई जानी चाहिए ताकि जनजातीय विकास के लिए आवंटित एक-एक पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके.