रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक कार्रवाई
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। पीड़ितों को तत्काल चतरा सदर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने जिला प्रशासन, उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और सिविल सर्जन के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें नियमानुसार हर संभव सहायता व मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
जांच के घेरे में तकनीकी और सुरक्षा मानक प्रारंभिक जांच में हादसे के पीछे एविएशन सेफ्टी, फ्लाइट ऑपरेशन SOP और एयरवर्थिनेस सर्टिफिकेशन की अनदेखी की आशंका जताई जा रही है। जांच टीम निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करेगी।
ब्लैक बॉक्स रिकवरी, विमान के डेटा रिकॉर्डर से अंतिम क्षणों की जानकारी जुटाई जाएगी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ हुए संवाद का विश्लेषण होगा। क्या इंजन या मैकेनिकल खराबी हादसे की वजह थी, क्या विजिबिलिटी या मौसम ने उड़ान में बाधा डाली यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन पाया गया, तो जिम्मेदारों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की आवश्यकता
डॉ. अंसारी ने इस दौरान राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी पर भी आत्ममंथन किया। उन्होंने कहा कि झारखंड में मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटर्स की कमी के कारण मरीजों को एयर एम्बुलेंस के जरिए दूसरे राज्यों में रेफर करना पड़ता है। यह हादसा व्यक्तिगत रूप से झकझोर देने वाला है और सरकार राज्य में ही विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।