Railway News: टाटानगर स्टेशन पर रविवार को रेल यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से 4 घंटे से भी अधिक की देरी से चल रही थी, जिसके कारण अंततः इसे टाटानगर में ही रद्द कर दिया गया. ट्रेन रद्द होने की सूचना मिलते ही सैकड़ों यात्री स्टेशन पर फंस गए और अपनी आगे की यात्रा को लेकर परेशान दिखे.
होली स्पेशल के प्रति फीका दिखा रुझान
होली के त्योहार को देखते हुए शुरू की गई टाटानगर-एर्नाकुलम होली स्पेशल ट्रेन भी रविवार को अपने तय समय से 3 घंटे की देरी से खुली. चौंकाने वाली बात यह रही कि यात्रियों की भीड़ को कम करने के लिए चलाई गई इस स्पेशल ट्रेन में एसी श्रेणी की अधिकांश सीटें खाली नजर आईं. आमतौर पर त्योहारों में ट्रेनों में मारामारी रहती है, लेकिन इस स्पेशल ट्रेन में सीटों का खाली रहना चर्चा का विषय बना रहा.
घंटों की देरी से पहुंचीं ये प्रमुख ट्रेनें
सिर्फ जनशताब्दी और होली स्पेशल ही नहीं, बल्कि टाटानगर आने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनें रविवार को लेट रहीं. इनमें मुख्य रूप से शामिल थीं:
• साउथ बिहार एक्सप्रेस (आरा-दुर्ग)
• इस्पात एक्सप्रेस (हावड़ा-टिटलागढ़)
• गीतांजलि एक्सप्रेस (मुंबई-हावड़ा)
• अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस
• बक्सर-बिलासपुर एक्सप्रेस
इन ट्रेनों के लेट होने से टाटानगर स्टेशन के प्लेटफॉर्मों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई. ट्रेनों के अनिश्चित समय के कारण यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को काफी असुविधा हुई.
रेलवे द्वारा होली के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाना एक सराहनीय कदम है, लेकिन टाटानगर-एर्नाकुलम ट्रेन में सीटों का खाली रहना यह संकेत देता है कि यात्रियों के बीच इस सेवा का पर्याप्त प्रचार नहीं हुआ या समय की अनिश्चितता के कारण लोगों ने अन्य विकल्पों को चुना. वहीं, जनशताब्दी जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन का अचानक रद्द होना और लंबी दूरी की ट्रेनों का घंटों लेट होना रेलवे के परिचालन प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है. यात्रियों के लिए “स्पेशल ट्रेन” का अर्थ तभी सार्थक है जब वह समय पर चले और उन्हें राहत पहुंचाए.