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  • 2026-02-22

Jharkhand News: झारखंड में अप्रैल से बदल जाएंगे श्रम कानून, 4 लेबर कोड लागू करने की तैयारी, जानें आपकी सैलरी और सुविधाओं पर क्या होगा असर

Jharkhand News: झारखंड सरकार राज्य के पुराने और जटिल श्रम कानूनों को खत्म कर केंद्र सरकार द्वारा गठित चार नए लेबर कोड को अप्रैल माह तक लागू करने की तैयारी में है. शनिवार को विधानसभा में पेश “झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025-26” में इस बड़े बदलाव का खुलासा किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार इन कानूनों को प्रभावी बनाने के लिए तेजी से नियमावलियां (Rules) तैयार कर रही है, जो झारखंड के लेबर मार्केट की सूरत बदल देंगे.

आपकी सैलरी और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा सीधा असर
नए लेबर कोड के लागू होने से कर्मचारियों की जेब और भविष्य की बचत पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा:
• बेसिक पे में बढ़ोत्तरी: “वेतन संहिता 2019” के तहत अब कुल सैलरी का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा “बेसिक पे” होना अनिवार्य होगा. इससे माइनिंग, स्टील और कंस्ट्रक्शन जैसे उद्योगों में नियोक्ताओं का खर्च 8 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकता है.
• 1 साल में ग्रेच्युटी: अब तक ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की सेवा अनिवार्य थी, जिसे घटाकर अब मात्र 1 साल करने का प्रस्ताव है. यह उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है जो छोटे अनुबंधों (कॉन्ट्रैक्ट) पर काम करते हैं.
• सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: गिग वर्कर, प्लेटफॉर्म वर्कर और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पहली बार सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाएगा. कोयला क्षेत्र के लाखों अनौपचारिक श्रमिकों के लिए यह जीवन बदलने वाला कदम साबित हो सकता है.

स्वास्थ्य और सुरक्षा के सख्त नियम
नए कानूनों में श्रमिकों की सेहत को प्राथमिकता दी गई है:
• सालाना हेल्थ चेकअप: खतरनाक उद्योगों में काम करने वाले 40 साल से अधिक उम्र के कामगारों के लिए सालाना हेल्थ चेकअप अनिवार्य होगा.
• सुरक्षा ऑडिट: कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों की समय-समय पर जांच की जाएगी ताकि दुर्घटनाओं को कम किया जा सके. इससे बीमारियों का जल्दी पता चलेगा और काम करने की स्थितियां बेहतर होंगी.

एमएसएमई और आदिवासी क्षेत्रों के लिए चुनौतियां
आर्थिक सर्वेक्षण में सुधारों के साथ-साथ चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और हैंडीक्राफ्ट जैसे कम मार्जिन वाले छोटे उद्योगों (MSME) पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है. साथ ही, दूरदराज के आदिवासी इलाकों तक इन नियमों की जानकारी पहुंचाना और वहां सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ा कार्य होगा. जब तक पूर्ण नियमावली नहीं आती, तब तक उद्योगों को “दोहरे नियमों” (पुराने और नए) के बीच अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है.
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