Jharkhand News: झारखंड विधानसभा में पेश किए गए 6,450 करोड़ रुपये के तृतीय अनुपूरक बजट को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने राज्य के इतिहास का एक निर्णायक अध्याय बताया है. उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि झारखंड के गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने का एक सशक्त संकल्प है. सरकार का लक्ष्य विकास को केवल फाइलों तक सीमित न रखकर उसे सीधे धरातल पर उतारना है, जिससे गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो सके.
ग्राम स्वशासन को मिलेगी असली मजबूती
मंत्री ने विशेष रूप से जानकारी दी कि राज्य के इतिहास में पहली बार स्टेट फाइनेंस कमीशन के अनुमोदन पर पंचायतों के लिए 605 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है. इस निर्णय को ग्राम स्वशासन को धरातल पर मजबूत करने वाला एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. इससे न केवल पंचायतों की वित्तीय स्थिति सुधरेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर विकास की निर्णय प्रक्रिया में ग्राम सभाओं की भूमिका भी अधिक प्रभावी और ऊर्जावान होगी.
सड़कों का जाल और आधारभूत संरचना पर जोर
बजट में ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 1,717.58 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है. इस राशि का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण सड़कों और पुल-पुलियों के निर्माण को रफ्तार देना है. इससे राज्य के दूरस्थ और पिछड़े इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे सीधे तौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही, पंचायती राज विभाग के लिए 658 करोड़ और ग्रामीण विकास विभाग के लिए 594.88 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
महिला सशक्तिकरण और आजीविका पर फोकस
ग्रामीण विकास के लिए आवंटित फंड से महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने और ग्रामीण आजीविका मिशन को गति देने की योजना है. सरकार की प्राथमिकता समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है. मंत्री के अनुसार, ग्रामीण आजीविका, सामाजिक सुरक्षा और गरीबों के उत्थान के कार्यक्रमों में इस निवेश से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे.
पंचायतों को सीधे तौर पर इतनी बड़ी राशि का आवंटन झारखंड में विकेंद्रीकृत शासन की ओर एक बड़ा कदम है. ग्रामीण कार्य और पंचायती राज विभागों को प्राथमिकता में रखना यह संकेत देता है कि सरकार का पूरा ध्यान बुनियादी ढांचे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने पर है. हालांकि, इस ऐतिहासिक बजट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह पैसा बिना किसी प्रशासनिक अड़चन के समय पर गांवों तक पहुंचे और इसका उपयोग पारदर्शिता के साथ ग्रामीण संपत्तियों के निर्माण में हो.