Jharkhand News: झारखंड के लिए राहत भरी खबर है कि राज्य ने गरीबी के मोर्चे पर शानदार सफलता हासिल की है. बहुआयामी गरीबी दर, जो साल 2015-16 में 42.10% थी, वह 2019-20 में घटकर 28.81% रह गई है. यानी महज पांच सालों में गरीबी में 13.29% की बड़ी गिरावट आई है. सर्वे के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकार की सौभाग्य योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के संयुक्त प्रभाव से बिजली, शौचालय और पेयजल सुविधाओं में हुए सुधार ने इस बदलाव में मुख्य भूमिका निभाई है.
सर्विस सेक्टर की बढ़त और बैंकिंग में उछाल
झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, आने वाले वर्षों में सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) की रफ्तार और तेज होने वाली है. अनुमान है कि 2026-27 तक इस क्षेत्र का योगदान 1,48,479 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा, जो कुल अर्थव्यवस्था का करीब 47% होगा. विशेष रूप से बैंकिंग, बीमा और वित्तीय सेवाओं में 11 से 19% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई है. राज्य में बैंकिंग का विस्तार भी तेजी से हुआ है; मार्च 2014 के मुकाबले जमा राशि 220% बढ़कर 3,79,735 करोड़ रुपये हो गई है.
स्थिर विकास की ओर बढ़ती जीएसडीपी
राज्य की आर्थिक वृद्धि दर (जीएसडीपी) में हल्की गिरावट का अनुमान लगाया गया है. साल 2024-25 में यह 7.02% थी (जो राष्ट्रीय औसत 6.5% से अधिक थी), जिसके 2025-26 में 6.17% रहने की संभावना है. सर्वे के अनुसार, यह गिरावट चिंता की बात नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि महामारी के बाद की तेज रिकवरी के बाद अब झारखंड की अर्थव्यवस्था एक स्थिर और टिकाऊ विकास की दिशा में बढ़ रही है.
विनिर्माण में तेजी और बढ़ता निवेश
झारखंड में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. अब राज्य का लक्ष्य केवल योजनाओं को लागू करना नहीं, बल्कि उनके परिणामों को जिला स्तर पर जमीन पर उतारना है. हालांकि कृषि की हिस्सेदारी में थोड़ी कमी आई है, लेकिन उत्पादन में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. अच्छी बात यह भी है कि राज्य में महंगाई दर (मुद्रास्फीति) लगभग 4% पर नियंत्रित है, जो आम आदमी के लिए राहत की बात है.
झारखंड का नया आर्थिक सर्वे एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है. गरीबी दर में आई भारी कमी यह बताती है कि बुनियादी ढांचागत योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचा है. हालांकि, विकास दर (जीएसडीपी) में हल्की कमी और कृषि क्षेत्र की घटती हिस्सेदारी यह संकेत देती है कि राज्य अब औद्योगिक और सेवा आधारित अर्थव्यवस्था की ओर शिफ्ट हो रहा है. चुनौती अब यह है कि सर्विस सेक्टर की इस बढ़त का लाभ ग्रामीण इलाकों और छोटे जिलों तक कैसे पहुंचे, ताकि विकास का पहिया पूरे राज्य में समान रूप से घूमे.