Jharkhand News: झारखंड के 48 नगर निकायों में कल, 23 फरवरी को चुनावी जंग का फैसला होने वाला है. शनिवार शाम प्रचार थमने के बाद अब प्रत्याशी चुपचाप घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं. इस बार का चुनाव तकनीकी से हटकर पारंपरिक अंदाज में हो रहा है, क्योंकि मतदाता ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर पर मुहर लगाकर अपने प्रतिनिधि चुनेंगे. दिलचस्प बात यह भी है कि इस बार चुनाव में “नोटा” का विकल्प नहीं दिया गया है, यानी मतदाताओं को मैदान में उतरे प्रत्याशियों में से ही किसी एक को चुनना होगा.
शाम पांच बजे तक डाले जाएंगे वोट
राज्य के 4,307 मतदान केंद्रों पर कल सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक वोट डाले जाएंगे. आंकड़ों की बात करें तो कुल 43,33,574 मतदाता इस चुनाव में हिस्सा लेंगे, जिनमें महिलाओं और पुरुषों की संख्या लगभग बराबर है. चुनाव आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है और पोलिंग पार्टियों को उनके केंद्रों के लिए रवाना कर दिया गया है. किसी भी तरह की तकनीकी या अन्य समस्या की स्थिति में प्रशासन ने पुनर्मतदान के लिए तीन दिन सुरक्षित रखे हैं.
27 फरवरी को होगी मतगणना
सबकी निगाहें अब 27 फरवरी को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं. आयोग ने इस बार तैयारी ऐसी की है कि नतीजे जल्दी आ सकें, जिसके लिए टेबल की संख्या बढ़ा दी गई है. संभावना है कि गोड्डा, पाकुड़ और हजारीबाग के नतीजे सबसे पहले आएंगे, जबकि धनबाद के परिणाम के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है. प्रशासन ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे लोकतंत्र के इस पर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें और बिना किसी डर के मतदान करें.
शहरी सरकार चुनने की यह कवायद झारखंड की स्थानीय राजनीति के लिए काफी अहम है. बैलेट पेपर का इस्तेमाल और नोटा का न होना इस चुनाव को पिछले चुनावों से अलग बनाता है. जहां भारी संख्या में संवेदनशील बूथों की मौजूदगी प्रशासन की अग्निपरीक्षा है, वहीं मतदाताओं का उत्साह यह तय करेगा कि शहरों के विकास की चाबी किसके हाथ लगेगी.