Dhanbad News: वन्यजीवों और प्रतिबंधित प्रजातियों की अवैध तस्करी का मामला फिर सामने आया है. उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले कछुआ तस्करी गिरोह और पश्चिम बंगाल से बिहार तक हो रही प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली की सप्लाई का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है. हाल में हुई छापेमारी के बाद प्रशासन भी सतर्क हो गया है.
RPF और GRP ने संयुक्त अभियान चलाया
धनबाद रेल मंडल में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेल पुलिस (GRP) ने संयुक्त अभियान चलाया. इस कार्रवाई के दौरान अलग - अलग ट्रेनों में तलाशी ली गई. जांच के समय कई लावारिस बैगों से सैकड़ों जिंदा कछुए बरामद किए गए. पुलिस के अनुसार तस्कर इन कछुओं को बैग में भरकर सीटों के नीचे छिपा देते थे. पकड़े जाने की स्थिति में वे खुद को बचाने के लिए बैग लावारिस छोड़ देते थे.
जांच में सामने आया कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश से कछुओं को लाकर पश्चिम बंगाल के बाजारों में पहुंचाता था. बरामद सभी कछुओं को वन विभाग को सौंप दिया गया है. विभाग अब उन्हें सुरक्षित तरीके से उनके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है.
थाई मांगुर की अवैध ढुलाई भी जारी
इसी के साथ प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली का अवैध कारोबार भी तेजी से फैल रहा है. पश्चिम बंगाल से सटे बिहार के कई जिलों में रोजाना छोटे पिकअप वाहनों के जरिए भारी मात्रा में यह मछली पहुंचाई जा रही है.
तस्कर मुख्य हाईवे से बचकर ग्रामीण सड़कों और कम निगरानी वाले रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे उन्हें जांच से बचने में आसानी होती है. हालांकि मत्स्य विभाग और स्थानीय पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं. कई बार बड़ी खेप जब्त की गई है और बरामद मछलियों को गड्ढे में दबाकर नष्ट किया गया है.
प्रशासन का कहना है कि इस तरह की तस्करी वन्यजीव संरक्षण कानून और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है. संयुक्त अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.