Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट ने रिम्स अतिक्रमण मामले में सख्त रुख अपनाते हुए रांची नगर निगम की आपत्ति को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों ने अतिक्रमण के बावजूद नक्शा पास किया या रसीदें काटीं, उन्हें अब एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के समक्ष ही अपनी सफाई देनी होगी. महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बिना पक्ष सुने कार्रवाई का विरोध किया था, लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को दरकिनार करते हुए जांच प्रक्रिया को जारी रखने का आदेश दिया.
मशीनों की खरीद के लिए मिला अतिरिक्त समय
अदालत ने रिम्स के विकास और जीवन रक्षक मशीनों की खरीद के लिए राज्य सरकार और रिम्स प्रबंधन को राहत देते हुए समय सीमा अप्रैल तक बढ़ा दी है. पूर्व में दी गई अवधि समाप्त होने के कारण प्रशासन ने कोर्ट से और वक्त मांगा था. हाई कोर्ट ने साफ किया कि अस्पताल की व्यवस्था में सुधार और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता में अब और देरी नहीं होनी चाहिए.
अदालत का यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” का संदेश है. अतिक्रमण में सरकारी तंत्र की संलिप्तता की जांच एसीबी से कराना जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम है. मशीनों की खरीद के लिए समय विस्तार देना प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने का मौका है, लेकिन अप्रैल के बाद कोर्ट का रुख और भी सख्त हो सकता है.