Municipal Elections: झारखंड में आगामी 23 फरवरी को होने वाले नगर निकाय चुनाव के मद्देनजर राज्य सरकार ने सुरक्षा और सुचारू मतदान सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं. मतदान के दिन संबंधित नगर निकाय क्षेत्रों की सभी दुकानें, व्यावसायिक संस्थान और औद्योगिक इकाइयां बंद रहेंगी. कार्मिक विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस दिन को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है ताकि मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर सकें.
बाहर काम करने वाले मतदाताओं को भी मिलेगी छुट्टी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी नगर निकाय क्षेत्र का पंजीकृत मतदाता है, लेकिन वह उस क्षेत्र की सीमा से बाहर किसी प्रतिष्ठान या औद्योगिक इकाई में कार्यरत है, तो उसे भी मतदान के लिए छुट्टी दी जाएगी. नियोक्ता की यह जिम्मेदारी होगी कि वह ऐसे कर्मचारी को मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश प्रदान करे. आदेश में साफ कहा गया है कि मतदान के लिए जाने वाले कर्मचारियों के वेतन में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी.
कैजुअल और दिहाड़ी मजदूरों पर भी लागू होगा नियम
इस बार नियम का दायरा बढ़ाते हुए कैजुअल (अस्थायी) और दैनिक वेतनभोगी मजदूरों को भी इसमें शामिल किया गया है. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की सुसंगत धाराओं के तहत, यदि कोई दिहाड़ी मजदूर संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता है, तो उसे भी सवैतनिक अवकाश की पात्रता होगी. संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि वे इन नियमों का कड़ाई से पालन करें ताकि समाज का हर वर्ग मतदान प्रक्रिया में शामिल हो सके.
मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश का प्रावधान लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है. अक्सर देखा जाता है कि दैनिक मजदूरी करने वाले या निजी क्षेत्र के कर्मचारी अपनी दिहाड़ी कटने के डर से मतदान केंद्र तक नहीं जाते. दिहाड़ी और अस्थायी कर्मियों को सवैतनिक अवकाश के दायरे में लाने से शहरी निकाय चुनाव के मतदान प्रतिशत में सुधार देखने को मिल सकता है. हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि श्रम विभाग और जिला प्रशासन इन आदेशों को निजी प्रतिष्ठानों में कितनी कड़ाई से लागू करवा पाते हैं.