India: भारत एक बार फिर वैश्विक नौसैनिक शक्ति के केंद्र के रूप में उभर रहा है। मिलन-2026 नौसैनिक युद्धाभ्यास के भव्य आयोजन के लिए भारतीय नौसेना पूरी तरह तैयार है। इसी कड़ी में रविवार को विशाखापत्तनम के तट पर थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के युद्धपोतों का पारंपरिक और गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
समुद्री सुरक्षा के लिए एकजुट हुए देश
हर दो साल में आयोजित होने वाला मिलन युद्धाभ्यास इस बार अपने अब तक के सबसे बड़े स्वरूप में नजर आ रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग को मजबूत करना और साझा सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए मित्र देशों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना है।
भारतीय नौसेना के प्रवक्ता के अनुसार, आने वाले दिनों में कई अन्य देशों के बेड़े भी इस अभ्यास में शामिल होंगे। यह युद्धाभ्यास न केवल सैन्य कौशल का प्रदर्शन है, बल्कि यह वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ समुद्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने का एक साझा मंच भी है।
अभ्यास के मुख्य आकर्षण
मिलन-2026 दो चरणों में आयोजित किया जाएगा इसमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पेशेवर चर्चाएं और खेल गतिविधियां शामिल होंगी। इसमें समुद्र के भीतर उन्नत युद्ध कौशल, एंटी-पैरसी ऑपरेशन और जटिल युद्धाभ्यास किए जाएंगे।
क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए यह युद्धाभ्यास अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत अपनी सागर पहल के तहत पड़ोसी और मित्र देशों के साथ रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। मिलन-2026 केवल एक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह विश्व को एक सुरक्षित और स्वतंत्र समुद्री व्यापार मार्ग सुनिश्चित करने का भारत का दृढ़ संकल्प है।