Seraikela News: सरायकेला जिले में बच्चों में कुपोषण की समस्या को कम करने के उद्देश्य से समर अभियान के प्रभावी संचालन के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में आंगनवाड़ी सेविकाओं, महिला पर्यवेक्षिकाओं और संबंधित विभागों के कर्मियों को विस्तृत जानकारी दी गई.
प्रशिक्षण के दौरान गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) और मध्यम रूप से कुपोषित (MAM) बच्चों की पहचान कैसे की जाए, उनका सही प्रबंधन कैसे हो तथा आवश्यक उपचार की प्रक्रिया क्या हो इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई. अधिकारियों ने बताया कि समय पर पहचान और उचित देखभाल से बच्चों को कुपोषण से बाहर निकाला जा सकता है.
कार्यक्षेत्र में ऐसे गांव, टोले और मोहल्लों की सूची तैयार करने का निर्देश
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने सभी आंगनवाड़ी कर्मियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में ऐसे गांव, टोले और मोहल्लों की सूची तैयार करें, जहां नए गंभीर कुपोषित बच्चों के मिलने की आशंका हो. उन्होंने कहा कि घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने से वास्तविक स्थिति सामने आएगी और जरूरतमंद बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सकेगी.
कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग और समाज कल्याण विभाग के बीच बेहतर तालमेल पर विशेष जोर दिया गया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दोनों विभागों के आपसी सहयोग से ही अभियान को सफल बनाया जा सकता है.
प्रशिक्षण के बाद यह तय किया गया कि जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों का नियमित रूप से वजन और लंबाई मापी जाएगी. इससे बच्चों की पोषण स्थिति की लगातार निगरानी की जा सकेगी और जिन बच्चों में कुपोषण के लक्षण दिखेंगे, उन्हें तुरंत उपचार और पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.
प्रशासन को उम्मीद है कि समर अभियान के माध्यम से सरायकेला जिले में कुपोषण दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी.