विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी
प्रतियोगिता में शहर के विभिन्न विद्यालयों से 5 से 13 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का शुद्ध उच्चारण, भावपूर्ण प्रस्तुति और आत्मविश्वास के साथ पाठ किया। प्रतिभागियों की प्रस्तुति ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान सभागार का वातावरण आध्यात्मिकता और संस्कारों से सराबोर रहा।
मुख्य अतिथि का प्रेरक संदेश
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाज सेविका पूर्वी घोष ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता मानव जीवन के लिए एक महान मार्गदर्शक ग्रंथ है, जो कर्म, कर्तव्य और आत्मविकास की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और उनके व्यक्तित्व विकास में सहायक होती हैं।
निष्पक्ष मूल्यांकन
गीता परिवार से आए निर्णायक मंडल के सदस्य रेणु बाला मिश्रा और वेंकट राम शर्मा ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन शुद्धता, भावाभिव्यक्ति और स्मरण क्षमता के आधार पर किया। निर्णायकों ने बच्चों की तैयारी और अनुशासन की सराहना की।
विजेताओं को किया गया सम्मानित
समापन समारोह में विजयी प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि पूर्वी घोष, साकेत कुमार और सुनील सिन्हा के कर-कमलों से स्वर्गीय उमेश्वर प्रसाद सिन्हा एवं स्वर्गीय सकल देव नारायण मेमोरियल रिवॉर्ड के अंतर्गत नकद पुरस्कार, स्मृति चिन्ह और प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सभी प्रतिभागियों को मेडल और सहभागिता प्रमाण-पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।
परिणाम
जूनियर वर्ग:
प्रथम – साई स्पर्श कैमी
द्वितीय – इपिल मुर्मु
तृतीय – मित्रजीत चक्रवर्ती
सीनियर वर्ग:
प्रथम – रिदम भारद्वाज
द्वितीय – अंजलि कुमारी
तृतीय – स्नेहा द्विवेदी
इस अवसर पर संगमित्रा बासु पाल और अंशु कुमारी को “गुरु सम्मान” से सम्मानित किया गया।
आभार एवं संचालन
कार्यक्रम के अंत में साईं परिवार जमशेदपुर के अध्यक्ष अनुप रंजन ने सभी अतिथियों, निर्णायक मंडल, प्रतिभागियों, अभिभावकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन अंशु कुमारी ने किया। आयोजन की सफलता में चेयरमैन राजीव कुमार सहित सभी सहयोगियों का सराहनीय योगदान रहा।