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  • 2026-02-05

Tata Steel Foundation: पूर्वी सिंहभूम जिले में क्लबफुट उन्मूलन की दिशा में टाटा स्टील फाउंडेशन की अग्रणी पहल, उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे

Jamshedpur: पूर्वी सिंहभूम जिले में क्लबफुट (टेढ़े पांव) जैसी जन्मजात विकृति के उन्मूलन की दिशा में टाटा स्टील फाउंडेशन (टीएसएफ) उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा है। इसी कड़ी में टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच), जिला स्वास्थ्य प्रशासन पूर्वी सिंहभूम एवं अनुष्का फाउंडेशन फॉर एलिमिनेटिंग क्लबफुट के सहयोग से सोनारी स्थित ट्राइबल कल्चर सेंटर में “नई राहें: नए कदम” शीर्षक से एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में क्लबफुट उन्मूलन परियोजना के सफल क्रियान्वयन के साथ-साथ टाटा स्टील समूह के भीतर सामाजिक उत्तरदायित्व और स्वयंसेवा की भावना का उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी, आईएएस थे। विशिष्ट अतिथियों में टाटा स्टील लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट (सेफ्टी, हेल्थ एंड सस्टेनेबिलिटी) राजीव मंगल, सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल तथा टाटा स्टील फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सौरव रॉय शामिल रहे।
समारोह में टाटा मेन हॉस्पिटल एवं सदर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकीय पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। इनमें जीएम (एमएस) डॉ. विनिता सिंह, सीएमआईएस डॉ. अशोक सुंदर, सीएमएसएस (टीएमएच) डॉ. ममता रथ एवं सदर अस्पताल के उप अधीक्षक डॉ. कमलेश प्रसाद प्रमुख थे। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. तपन मुर्मू सहित अन्य चिकित्सक और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

जानकारी दी गई कि पिछले दो वर्षों में क्लबफुट उन्मूलन परियोजना के तहत पूर्वी सिंहभूम जिले में क्लबफुट से प्रभावित 80 से अधिक बच्चों की पहचान कर उन्हें सफलतापूर्वक उपचार उपलब्ध कराया गया है। इन बच्चों का इलाज विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त, बिना सर्जरी वाली पॉन्सेटी पद्धति से किया जा रहा है, जो किफायती होने के साथ-साथ समय पर सुधार और बच्चों को दीर्घकालीन गतिशीलता प्रदान करने में सहायक है।

परियोजना की सफलता का श्रेय प्रभावित परिवारों, मानसी+ टीम, सरकारी अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों तथा टाटा मेन हॉस्पिटल और सदर अस्पताल के ऑर्थोपेडिक सर्जनों, डीएनबी रेजिडेंट्स, ड्रेसर्स एवं चिकित्सा स्टाफ को दिया गया, जिनके समर्पित स्वयंसेवी प्रयासों से बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव हो सका।

सम्मान समारोह के दौरान चिकित्सकों, रेजिडेंट्स और ड्रेसर्स को उनके स्वैच्छिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। वहीं उपचाररत बच्चों के परिवारों को भी इस कठिन उपचार प्रक्रिया के दौरान उनके धैर्य, साहस और निरंतर सहयोग के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
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