Curd Sugar Ritual: केंद्रीय बजट 2026 पेश होने से पहले राष्ट्रपति भवन में एक पारंपरिक दृश्य सामने आया, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को दही-चीनी खिलाकर शुभकामनाएं दीं. यह रस्म हर बार बजट से पहले निभाई जाती है और इसे नई जिम्मेदारी के लिए सकारात्मक शुरुआत माना जाता है
सिर्फ परंपरा नहीं, तनाव से जुड़ा है इसका संबंध
बजट तैयार करना और उसे पेश करना एक लंबी और तनावपूर्ण प्रक्रिया होती है. ऐसे में दही और चीनी का मेल शरीर और मन दोनों को संतुलन देने में मदद करता है. दही पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में सहायक होता है और तनाव के असर को कम करता है. वहीं चीनी तुरंत ऊर्जा देकर दिमाग को सक्रिय बनाए रखती है.
आयुर्वेदिक भी करता है पुष्टि
आयुर्वेद में दही को ठंडक देने वाला और सात्विक भोजन माना गया है. यह मन को शांत करता है और शरीर में संतुलन बनाए रखता है. चीनी के साथ इसका सेवन शरीर में ऐसे रसायन सक्रिय करता है जो मूड बेहतर बनाते हैं और आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं. इसी कारण इसे किसी भी बड़े काम से पहले शुभ माना जाता है.
संस्कृति और प्रतीक का संदेश
भारतीय परंपरा में दही को शुद्धता और शांति का प्रतीक माना जाता है जबकि मीठा अच्छे परिणाम का संकेत देता है. ज्योतिषीय मान्यताओं में भी दही और चीनी के मेल को मन और निर्णय शक्ति से जोड़ा गया है. यही कारण है कि यह रस्म केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और मानसिक तैयारी का प्रतीक भी बन गई है.
नई शुरुआत को मीठा बनाने की सोच
देश का बजट हो या कोई व्यक्तिगत शुभ कार्य, दही चीनी की रस्म यह बताती है कि हर नई शुरुआत सकारात्मक सोच और ऊर्जा के साथ होनी चाहिए. यही भावना इस परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है.
दही चीनी की यह रस्म केवल आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे मनोवैज्ञानिक और स्वास्थ्य से जुड़ा तर्क भी है. परंपरा और आधुनिक सोच का यह मेल दिखाता है कि भारतीय संस्कृति में हर रिवाज के पीछे कोई न कोई व्यावहारिक अर्थ छुपा होता है.