Current News: अब आईपीएस अधिकारियों के करियर की दिशा पहले जैसी नहीं रहेगी. केंद्र सरकार ने ऐसा नियम लागू कर दिया है, जिससे आईजी रैंक तक पहुंचने का रास्ता सीधे दिल्ली से होकर गुजरेगा. अब सिर्फ राज्य कैडर में लंबी सेवा करने से आईजी बनना संभव नहीं होगा, बल्कि केंद्र सरकार के साथ काम करने का अनुभव भी जरूरी शर्त बन गया है.
गृह मंत्रालय ने जारी किया राज्यों को पत्र
28 जनवरी को गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस संबंध में पत्र जारी किया है. इसमें साफ कहा गया है कि वर्ष 2011 बैच और उसके बाद के सभी आईपीएस अधिकारियों पर यह नियम अनिवार्य रूप से लागू होगा. इसका मतलब यह है कि अब नई पीढ़ी के अधिकारियों को अपने करियर की योजना केंद्र को ध्यान में रखकर बनानी होगी.
दो साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का अनुभव होना जरूरी
नए निर्देश के अनुसार किसी भी आईपीएस अधिकारी को केंद्र सरकार में आईजी या उसके समकक्ष पद पर तैनात होने के लिए एसपी या डीआईजी रैंक पर कम से कम दो साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का अनुभव होना जरूरी होगा. बिना केंद्र में काम किए अब आईजी पद तक पहुंचना संभव नहीं रहेगा.
अब तक बड़ी संख्या में अधिकारी केवल अपने कैडर राज्य में सेवा करते रहे हैं. राज्य सरकारें डीजी और एडीजी स्तर के लिए तो नाम भेजती रही हैं, लेकिन एसपी और आईजी स्तर पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए पर्याप्त प्रस्ताव नहीं आ रहे थे. यही वजह है कि केंद्र सरकार को यह कदम उठाना पड़ा.
करियर के शुरुआती चरण में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति करना होगा आवेदन
दिसंबर तक के आंकड़ों के अनुसार केंद्र में एसपी स्तर के 229 स्वीकृत पदों में से 104 खाली हैं. वहीं डीआईजी स्तर पर 256 पदों में से 69 रिक्त हैं. इन पदों पर योग्य अधिकारियों की कमी लंबे समय से बनी हुई है. इस आदेश के बाद अब 2011 और उसके बाद के बैच के अधिकारियों को अपनी रणनीति बदलनी होगी. जो अधिकारी अब तक केवल राज्य सेवा में रहकर प्रमोशन की उम्मीद करते थे, उन्हें अब करियर के शुरुआती चरण में ही केंद्रीय एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन करना होगा. तभी भविष्य में आईजी, एडीजी या डीजी जैसे पदों तक पहुंच संभव हो सकेगा.
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच विवाद पुराना है. वर्ष 2021 में भी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने प्रस्ताव रखा था कि केंद्र बिना राज्य की सहमति के भी अधिकारियों को बुला सके. लेकिन राज्यों के विरोध के कारण वह लागू नहीं हो सका. वर्तमान व्यवस्था में अधिकारी की सहमति और राज्य सरकार की मंजूरी दोनों जरूरी होती हैं.
आने वाले वर्षों में पुलिस सेवा की संरचना होगा असर
नए नियम से आईपीएस अधिकारियों का करियर ढांचा बदल जाएगा. राज्य कैडर तक सीमित रहने की सोच अब नुकसानदेह साबित हो सकती है. केंद्र सरकार इस बदलाव के जरिए न केवल रिक्त पदों को भरना चाहती है, बल्कि एक ऐसा सिस्टम बनाना चाहती है जिसमें वरिष्ठ पदों पर पहुंचने से पहले अधिकारियों को राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अनुभव हो. यह फैसला आने वाले वर्षों में पुलिस सेवा की संरचना और नेतृत्व दोनों पर गहरा असर डालेगा.