Political News: कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान को तेज करते हुए छह राज्यों के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है. इस कवायद का मकसद जिलों में संगठन को नए सिरे से खड़ा करना और जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की प्रक्रिया को गति देना है. इसी क्रम में बिहार के लिए जिन नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है, उनमें झारखंड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर का नाम एक बार फिर प्रमुख रूप से शामिल है.
झारखंड के कई नेताओं को मिली जिम्मेदारी
बिहार में संगठन सृजन की निगरानी के लिए बनाए गए पर्यवेक्षकों में राजेश ठाकुर के साथ विधायक राजेश कच्छप, श्वेता सिंह और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद को भी शामिल किया गया है. इन तीनों को दूसरी बार यह दायित्व सौंपा गया है. वहीं जयशंकर पाठक को पहली बार बिहार में पर्यवेक्षक के रूप में जिम्मेदारी दी गई है.
पहले भी कई राज्यों में निभा चुके हैं भूमिका
राजेश ठाकुर इससे पहले मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी संगठन सृजन की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. बिहार में उन्हें दोबारा भेजे जाने को नेतृत्व के भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है. इससे पहले भी वे बिहार में वोटर अधिकार यात्रा के प्रभारी रह चुके हैं.
नेतृत्व के भरोसे पर खरे उतरते रहे
झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटने के बाद भी राजेश ठाकुर को पार्टी ने लगातार अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं. संगठन के भीतर उन्हें एक सक्रिय और भरोसेमंद संगठनकर्ता के रूप में देखा जाता है. यही वजह है कि पार्टी ने एक बार फिर बिहार जैसे अहम राज्य में उन्हें संगठन सृजन की कमान दी है.
कांग्रेस का यह फैसला साफ संकेत देता है कि पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए अनुभवी नेताओं पर भरोसा जता रही है. बिहार में राजेश ठाकुर की पुनर्नियुक्ति यह दर्शाती है कि नेतृत्व उनके कामकाज और संगठनात्मक क्षमता से संतुष्ट है. आने वाले दिनों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति और संगठनात्मक ढांचे में होने वाले बदलाव इस अभियान की दिशा और असर को तय करेंगे.