Jharkhand News: पश्चिमी सिंहभूम के घने सारंडा जंगल में हुए बड़े नक्सल ऑपरेशन को अचानक की गई कार्रवाई मानना गलत होगा. इस ऑपरेशन की बुनियाद महीनों पहले पड़ चुकी थी. सुरक्षाबलों के पास इनामी नक्सलियों की हर हलचल की जानकारी पहले से मौजूद थी. जैसे ही सही समय और सटीक लोकेशन मिली, जंगल में छिपे नक्सली दस्तों पर निर्णायक कार्रवाई कर दी गई.
केरल से गिरफ्तारी ने खोले सारंडा के राज
सारंडा जंगल में सक्रिय इनामी नक्सलियों को अंजाम तक पहुंचाने की रणनीति तीन महीने पहले ही तय हो चुकी थी. केरल से गिरफ्तार सावन टूटी से एनआईए को नक्सली संगठन से जुड़े अहम सुराग मिले थे. सावन टूटी पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोकलो थाना क्षेत्र के झरझरा इलाके की लांजी पहाड़ी में वर्ष 2023 में हुए डायरेक्शनल बम विस्फोट का मास्टरमाइंड था और लंबे समय से फरार चल रहा था. एनआईए ने उसे 14 अक्तूबर 2025 को केरल के इडुक्की इलाके से गिरफ्तार किया था और रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी.
इनामी नक्सलियों तक पहुंचने का इनपुट
पूछताछ के दौरान यह साफ हुआ कि सावन टूटी की नजदीकी इनामी नक्सली अनल दा उर्फ प्रतिराम माझी, मिसिर बेसरा और असीम मंडल से थी. उसके पास उनके ठिकानों, मूवमेंट और नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारियां थीं. सूत्रों के अनुसार इसी इनपुट के आधार पर सुरक्षाबलों को सारंडा में सक्रिय नक्सली दस्तों की सटीक स्थिति पहले से मालूम थी.
सारंडा में अब भी सक्रिय हैं नक्सली दस्ते
सारंडा जंगल में दो करोड़ बीस लाख के इनामी नक्सलियों के तीन अलग-अलग दस्ते सक्रिय थे. हालिया ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने 2 करोड़ 35 लाख के इनामी अनल दा उर्फ प्रतिराम माझी के दस्ते को खत्म कर दिया है. इसके बाद अब भी दो इनामी नक्सलियों के दस्ते जंगल में मौजूद बताए जा रहे हैं. इन दस्तों में करीब 60 से 65 नक्सलियों के सक्रिय होने की सूचना है.
मुठभेड़ स्थल से भारी हथियार बरामद
मुठभेड़ में मारे गए 17 नक्सलियों के पास से सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की है. इनमें थ्री नॉट थ्री राइफल, AK 47 और इंसास राइफल जैसे हथियार शामिल हैं. नक्सलियों के पास कैडर स्तर के अनुसार हथियार और दैनिक उपयोग का सामान भी मिला है. ऑपरेशन अब भी जारी है.
दस किलोमीटर इलाके में कड़ा घेरा
सुरक्षाबलों ने किरीबुरु के कुमड़ी इलाके में पिछले दो दिनों से जारी रुक-रुक कर हो रही फायरिंग के बाद पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर रखी है. करीब दस किलोमीटर के दायरे में जवान तैनात हैं. जंगल की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर निगरानी रखी जा रही है. ग्रामीणों से बार बार घरों में ही रहने की अपील की जा रही है.
घने जंगल और आईईडी के बीच सर्च ऑपरेशन
चक्रधरपुर के छोटानागरा और किरीबुरु थाना क्षेत्र के बीहड़ इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. इलाका उबड़-खाबड़ पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा हुआ है. जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है. नक्सलियों ने जगह जगह आईईडी बिछा रखी है. इन हालातों में कोबरा और अन्य सुरक्षाबलों के जवान बेहद सतर्कता के साथ ऑपरेशन चला रहे हैं.
घायल नक्सलियों की तलाश जारी
पिछले दो दिनों से जारी मुठभेड़ में कई नक्सलियों के घायल होने की सूचना है. बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों की घेराबंदी के कारण नक्सली बाहर निकल नहीं पा रहे हैं. ड्रोन कैमरों से इलाके की निगरानी की जा रही है. 4 से 5 और नक्सलियों के जंगल में छिपे होने की आशंका जताई जा रही है. मृतकों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है.
सारंडा ऑपरेशन यह दिखाता है कि नक्सल विरोधी कार्रवाई अब तात्कालिक नहीं बल्कि इंटेलिजेंस आधारित और लंबी रणनीति का हिस्सा बन चुकी है. सावन टूटी की गिरफ्तारी से मिले इनपुट ने पूरे ऑपरेशन की दिशा तय की. सुरक्षाबलों की घेराबंदी और तकनीक का इस्तेमाल यह संकेत देता है कि आने वाले समय में सारंडा जैसे इलाकों में नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाने लगातार सिमटते जाएंगे.