प्रमुख आपत्तियां और गृह मंत्रालय का रुख
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 13 जनवरी को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि झारखंड में पिछले तीन मौकों पर की गई DGP की नियुक्तियां तय नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के खिलाफ हैं। मंत्रालय ने तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को असंवैधानिक करार देते हुए निर्देश दिया है कि उन्हें 31 दिसंबर 2025 से ही सेवानिवृत्त माना जाए।
विवाद का मुख्य कारण
मामले की जड़ तदाशा मिश्रा की सेवा अवधि और नियुक्ति का समय है। नियमों की अनदेखी, नियमों के अनुसार, DGP पद के लिए अधिकारी के पास कम से कम 6 महीने का कार्यकाल शेष होना चाहिए। अंतिम समय में फैसला, तदाशा मिश्रा को सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले स्थायी DGP नियुक्त किया गया, जबकि वे पहले से प्रभारी पद पर थीं।
विपक्ष का हमला है कि
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 7 जनवरी को केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुराग गुप्ता के इस्तीफे के बाद नियमों को दरकिनार कर यह कदम उठाया गया।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल
यह पहला मौका नहीं है जब झारखंड में DGP की नियुक्ति विवादों में है। इससे पहले अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पर भी केंद्र ने आपत्ति जताई थी। अब तदाशा मिश्रा के मामले में केंद्र के सख्त रुख ने राज्य सरकार की मुश्किलों को बढ़ा दिया है।