National News: केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस के भीतर असहज स्थिति सामने आई है. वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने दिल्ली में होने वाली पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक से खुद को अलग रखा है. इसे राहुल गांधी से उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे सियासी हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.
दिल्ली बैठक में नहीं पहुंचे थरूर
कांग्रेस आलाकमान की ओर से दिल्ली में केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक प्रस्तावित थी. इस बैठक में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी तय मानी जा रही थी. सूत्रों के मुताबिक शशि थरूर इस बैठक में शामिल नहीं हुए और फिलहाल केरल में ही मौजूद हैं.
कोच्चि कार्यक्रम बना नाराजगी की वजह
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शशि थरूर हाल ही में कोच्चि में आयोजित राहुल गांधी की महापंचायत के दौरान हुए घटनाक्रम से असहज बताए जा रहे हैं. कार्यक्रम में राहुल गांधी के आने से पहले थरूर से अपना भाषण समाप्त करने को कहा गया था. थरूर ने इसे उचित सम्मान न मिलने के तौर पर लिया और इसी वजह से बैठक से दूरी बनाए रखने की बात सामने आ रही है.
कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. पार्टी के भीतर इसे संवेदनशील मुद्दा माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की नाराजगी संगठन के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है.
केरल में थरूर की अहमियत
शशि थरूर केरल में कांग्रेस का एक मजबूत और लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं. शहरी मध्यम वर्ग और युवा मतदाताओं में उनकी खास पकड़ है. ऐसे में चुनावी रणनीति से जुड़ी बैठकों से उनकी गैरमौजूदगी को पार्टी के लिए नुकसानदेह माना जा रहा है.
थरूर के कार्यालय की सफाई
शशि थरूर के कार्यालय ने इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की है. कार्यालय के अनुसार थरूर 23 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली केरल कांग्रेस की बैठक में शामिल नहीं हो पाए क्योंकि वे कालीकट में आयोजित केरल लिटरेचर फेस्टिवल में व्यस्त हैं. यह एशिया का सबसे बड़ा साहित्य महोत्सव बताया गया है. कार्यालय ने कहा कि थरूर अपनी नई पुस्तक पर बोलने के लिए पहले से तय कार्यक्रम में शामिल हैं और पार्टी को इसकी जानकारी पहले ही दे दी गई थी.
पहले भी बयान से बढ़ी थी चर्चा
इससे पहले शशि थरूर के एक बयान ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी थी. उन्होंने कहा था कि वे यह नहीं मानते कि मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी है, लेकिन यह सरकार नेहरू विरोधी जरूर है. उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के योगदान की सराहना करते हुए यह भी कहा था कि नेहरू की गलतियों पर सवाल उठाना जरूरी है, लेकिन हर समस्या के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है.
केरल चुनाव से पहले शशि थरूर की बैठक से दूरी ने कांग्रेस की अंदरूनी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. भले ही आधिकारिक तौर पर वजह साहित्यिक कार्यक्रम बताई जा रही हो, लेकिन राजनीतिक संदेश साफ है कि पार्टी के भीतर असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व इस स्थिति को कैसे संभालता है, यह केरल की सियासत के लिए अहम साबित होगा.