संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायक कहानी
जय शंकर कामत की यह सफलता उनके कठिन परिश्रम और एक अनुशासित परवरिश का परिणाम है। उनके पिता, सहदेव कामत, टाटा मोटर्स से 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे, जिसके बाद वह बारीगोरा में ही एक दुकान चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। वहीं उनकी माता, रानी देवी, एक कुशल गृहणी हैं, जिन्होंने जय शंकर के सपनों को संवारने में अहम भूमिका निभाई।
जय शंकर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा छोटा गोविंदपुर स्थित विवेक विद्यालय से प्राप्त की। बचपन से ही देश सेवा का जज्बा रखने वाले जय शंकर ने कड़ी मेहनत की और वर्ष 2021 में भारतीय नौसेना का हिस्सा बने। उन्होंने नौसेना की SSR परीक्षा पास की और वर्तमान में वह एयरक्राफ्ट इंजीनियर विभाग में नेवल एयर मैकेनिक के पद पर देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
खुशी से झूम उठा बारीगोरा क्षेत्र
जैसे ही जय शंकर के दिल्ली परेड में चयनित होने की खबर परसुडीह पहुंची, पूरे क्षेत्र में उल्लास का माहौल छा गया। परिवार और दोस्तों ने मिठाई बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। जय शंकर ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद और दोस्तों के अटूट सहयोग को दिया है। उनके पिता सहदेव कामत कि एक सैनिक के पिता के रूप में आज उनका सिर गर्व से ऊंचा हो गया है।
युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी
जमशेदपुर के युवाओं के लिए जय शंकर एक रोल मॉडल बनकर उभरे हैं। यह खबर उन हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है जो रक्षा क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखते हैं।
समय की मांग और युवाओं
के लिए अपील
जय शंकर कामत की कहानी हमें सिखाती है कि सफलता केवल बड़े शहरों या बड़े संसाधनों की मोहताज नहीं होती। एक साधारण परिवार का युवक भी अपनी मेहनत से देश के सबसे प्रतिष्ठित मंच राजपथ तक पहुँच सकता है। जमशेदपुर के युवाओं से अपील है कि वे जय शंकर की इस उपलब्धि से प्रेरणा लें। सोशल मीडिया और भटकाव के इस दौर में, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें। याद रखें, जब आप मेहनत करते हैं, तो केवल आप ही सफल नहीं होते, बल्कि आपका पूरा क्षेत्र और शहर गौरवान्वित होता है। आइए, जय शंकर की तरह आप भी अपने-अपने क्षेत्र में श्रेष्ठ बने।