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  • 2026-01-20

Jharkhand Child Smuggling: अंश-अंशिका केस से खुला खौफनाक बाल तस्करी का जाल, गिरोह के 15 आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने 50 बच्चों को किया बरामद

Jharkhand: रांची के धुर्वा इलाके से मासूम अंश और अंशिका की सकुशल बरामदगी के बाद अब पुलिस की कार्रवाई एक और बड़ी खतरनाक बाल तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करती नजर आ रही है। यह मामला अब सिर्फ दो बच्चों के अपहरण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके तार झारखंड समेत कई राज्यों तक फैले एक संगठित अपराध गिरोह से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं।

14 जनवरी के बाद से रांची शहर और उसके आसपास के इलाकों में पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी जारी है। हर एक बीते  दिन के साथ इस केस में नया मोड़ सामने आते गया और तस्करी के इस नेटवर्क की एक-एक परत खुलती जा रही है। इसी क्रम में रांची पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने अलग-अलग ठिकानों पर दबिश देकर अब तक कुल 50 बच्चों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया है। ये सभी बच्चे बाल तस्करी के आरोपियों और उनसे जुड़े लोगों के पास से बरामद किए गए हैं।

सोमवार को पुलिस ने इन सभी 50 बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया। इनमें से 12 बच्चे ऐसे हैं जिन्हें पुलिस ने सिर्फ एक दिन पहले ही तस्करों के कब्जे से आज़ाद कराया था। प्रारंभिक जांच में यह साफ हो चुका है कि इन 12 बच्चों का अपहरण पूरी तरह से बाल तस्करी के इरादे से किया गया था। हालांकि, बाकी 38 बच्चों को लेकर अभी भी कई सवाल अनसुलझे हैं कि ये बच्चे किसके हैं, कहां से लाए गए, और क्या उन्हें भी तस्करी के उद्देश्य से रखा गया था? पुलिस इन सभी पहलुओं की गहन जांच में जुटी हुई है।

इस पूरे सनसनीखेज मामले की जड़ें 2 जनवरी से जुड़ी हैं, जब धुर्वा थाना क्षेत्र से अंश और अंशिका के अपहरण की घटना सामने आई थी। इस केस ने पूरे रांची को हैरान कर रख दिया था। इसके बाद 17 जनवरी को धुर्वा थाना में 13 बाल तस्करों और 12 बरामद बच्चों को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई। तभी से रांची पुलिस की SIT लगातार इस खतरनाक नेटवर्क को बेनकाब करने में जुटी हुई है।

गिरोह का सरगना, कई नाम और कई चेहरे

जिसके बाद पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड रामगढ़ जिले के कोठार गांव का रहने वाला विरोधी खेरवार है। उसके साथ कोठार का ही एंथोनी खेरवार और सिल्ली थाना क्षेत्र के टुटकी नवाडीह का रहने वाला आशिक गोप जैसे कई अहम लोग इस नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इन सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की तैयारी में है, ताकि इस गिरोह की पूरी संरचना और काम करने के तरीके को उजागर किया जा सके।

जिन 12 बच्चों के बारे में यह स्पष्ट हो चुका है कि उन्हें तस्करी के उद्देश्य से अगवा किया गया था, उनके माता-पिता की तलाश में पुलिस दिन-रात जुटी हुई है। माता-पिता की पहचान और सत्यापन के बाद बच्चों का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे सही परिवार को ही सौंपे जाएं। ये बच्चे रांची के सिल्ली, रामगढ़ के कोठार और लातेहार जिले के बारियातू इलाके से बरामद किए गए हैं।

गिरफ्तारियों का आंकड़ा बढ़ा, चौंकाने वाले खुलासे

इस मामले में अब तक 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें एक नाम राज रवानी का भी शामिल है, जो लातेहार जिले के शिव टोला, बारियातू का रहने वाला है। पुलिस पूछताछ में उसने दावा किया है कि उसके 14 बच्चे हैं और उसने दो शादियां की हैं। पुलिस इस दावे की भी गहन जांच कर रही है, क्योंकि आशंका है कि वह बच्चों को अपने बताए जाने के बहाने छिपाकर रखता था।

रविवार को भी पुलिस ने इस गिरोह के 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था और उनके कब्जे से 12 और बच्चों को मुक्त कराया गया था। अब तक गिरफ्तार आरोपियों में 9 पुरुष और 6 महिलाएं शामिल हैं। इनमें से 12 लोग सीधे तौर पर बच्चों के अपहरण में शामिल थे, जबकि 3 आरोपी बच्चों को खरीदने और आगे बेचने का काम करते थे।

झोपड़पट्टियों के बच्चे थे आसान शिकार

रांची के एसएसपी राकेश रंजन के मुताबिक यह गिरोह किसी खानाबदोश गिरोह की तरह काम करता था, और मौका मिलते ही यह लोग बच्चों को उठा लेते थे। इन आरोपियों का मुख्य निशाना झोपड़पट्टियों में रहने वाले बच्चे होते थे, जो कि कूड़ा चुनने या बेहद गरीब परिवारों से होते थे। आरोपियों का शिकार ऐसे बच्चे होते थे जिनके लापता होने पर तुरंत कोई बड़ा हंगामा नहीं होता।

अगर तुरंत कोई खरीदार नहीं मिलता, तो ये लोग बच्चों को एक-दो साल तक अपने पास रखते थे, उन्हें अपना बच्चा बताकर पालते थे और बाद में उन्हीं बच्चों से चोरी, पॉकेटमारी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियां करवाते थे।

झारखंड से बाहर तक फैला नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक यह गिरोह सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है। इसके तार ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार तक जुड़े हुए हैं। गिरफ्तार किए गए कई आरोपी पहले से ही चार्जशीटेड हैं। पुलिस का मानना है कि यह कोई साधारण अपराधी समूह नहीं, बल्कि बच्चों की चोरी और मानव तस्करी में माहिर एक प्रोफेशनल गैंग है, जो वर्षों से इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहा था।

अब जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इस बाल तस्करी नेटवर्क की डरावनी कहानी एक-एक कर सामने आती जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होंगी और कई और मासूम बच्चों को इस अमानवीय जाल से आज़ादी मिलेगी।
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