Ranchi Crime News: रांची के पंडरा ओपी क्षेत्र अंतर्गत पिस्का मोड़ के पास शनिवार रात हुई ताबड़तोड़ गोलीबारी का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. यह घटना जमीन विवाद और पैसों के लेनदेन को लेकर दो गुटों के बीच हुई थी. गोलीबारी में दोनों पक्षों के तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है.
एसएसपी के निर्देश पर बनी विशेष टीम
एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर सिटी एसपी और कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोए के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया था. टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में संलिप्त छह अपराधियों को गिरफ्तार किया. रांची पुलिस ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी.
गिरफ्तार आरोपियों के नाम
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में संजय पांडेय, आशु कुमार, जुबैर खान, संतोष कुमार, पप्पू साव और रोहित पांडे शामिल हैं. पुलिस ने इनके पास से हथियार सहित अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की है.
तीन एकड़ जमीन बना विवाद की जड़
पुलिस के अनुसार विवाद कांके रिंग रोड के सुकरहुटू मनातु इलाके में स्थित करीब तीन एकड़ जमीन को लेकर था. इसी जमीन के साथ पैसों के लेनदेन को लेकर दोनों गुटों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था.
दोपहर में मारपीट और रात में गोलीबारी
घटना वाले दिन 17 जनवरी की दोपहर करीब एक बजे आकाश सिंह और विकास सिंह गुट की दूसरे गुट संजय पांडेय, रवि यादव और आशु साव के साथ मारपीट हुई थी. इसी विवाद को सुलझाने के लिए शाम को बैठक तय की गई थी.
मीटिंग के दौरान बिगड़े हालात
17 जनवरी की रात करीब सात बजे पिस्का मोड़ स्थित राजधानी मान्या टावर के पास दोनों गुटों के बीच बातचीत शुरू हुई. आकाश सिंह और विकास सिंह अपने 10 से 15 साथियों के साथ तीन गाड़ियों में पहुंचे थे. वहीं संजय पांडेय और उसके सहयोगी भी 10 से 12 लोगों के साथ तीन वाहनों में वहां पहुंचे. बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और संजय पांडेय व रवि यादव गुट की ओर से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी गई.
तीन लोग गंभीर रूप से घायल
गोलीबारी में आकाश सिंह के दाहिने हाथ में एक गोली लगी. विकास सिंह के सीने में दो और बाएं हाथ में एक गोली लगी है. वहीं दूसरे गुट के रवि यादव के बाएं हाथ और चेहरे पर गोली लगने की बात सामने आई है. सभी घायलों का इलाज जारी है.
कानून व्यवस्था के लिए चुनौती
यह घटना रांची में जमीन विवाद और आपराधिक वर्चस्व की गंभीर तस्वीर सामने लाती है. खुलेआम फायरिंग होना कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है. हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से स्थिति पर नियंत्रण पाया गया है. अब आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया से यह तय होगा कि इस तरह की घटनाओं पर कितनी सख्ती से लगाम लगाई जा सकती है.