Delhi: भारतीय आकाश की सुरक्षा को और अभेद्य बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को विस्तार देने के लिए सरकार ने 6 मल्टी रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट विमानों की खरीद को औपचारिक मंजूरी दे दी है। लगभग 1.1 अरब डॉलर के इस सौदे का उद्देश्य वायुसेना की मिड-एयर रिफ्यूलिंग की क्षमता को दोगुना करना है।
रणनीतिक बढ़त और मारक क्षमता
वर्तमान में भारतीय वायुसेना अपने बेड़े में शामिल पुराने टैंकरों पर निर्भर है, लेकिन इन नए MRTT विमानों के आने से लड़ाकू विमानों की ऑपरेशनल रेंज में जबरदस्त इजाफा होगा। इसका सीधा अर्थ है कि सुखोई-30 MKI और राफेल जैसे लड़ाकू विमान अब बिना जमीन पर उतरे लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम होंगे। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षमता हिंद महासागर और सीमाओं पर चीन व पाकिस्तान जैसी चुनौतियों से निपटने में गेम-चेंजर साबित होगी।
मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
यह मेगा-प्रोजेक्ट इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और भारत की दिग्गज रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच एक महत्वपूर्ण सहयोग के तहत पूरा किया जाएगा। इस साझेदारी के माध्यम से न केवल नई तकनीक का हस्तांतरण होगा, बल्कि भारत में रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बल मिलेगा।
इन विमानों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना न केवल एक क्षेत्रीय रक्षक बल्कि एक ग्लोबल स्ट्राइक फोर्स के रूप में उभरेगी। हवा में ईंधन भरने की बेहतर क्षमता मिशन की प्रभावशीलता को बढ़ाती है, जिससे युद्ध की स्थिति में पायलटों को ईंधन की चिंता किए बिना दुश्मन के ठिकानों को ध्वस्त करने की आजादी मिलती है।