Jharkhand News: पेयजल विभाग में हुए बड़े वित्तीय घोटाले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. विभाग के क्लर्क संतोष कुमार ने सरकारी पैसों की फर्जी निकासी के लिए दिसंबर 2022 में मेसर्स रॉक ड्रिल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी बनाई थी. हैरानी की बात यह है कि इस कंपनी ने कभी भी पेयजल विभाग या राज्य के किसी अन्य विभाग के किसी भी टेंडर में हिस्सा नहीं लिया.
इसके बावजूद, विभाग के अंदर रची गई साजिश के तहत इसी कंपनी के बैंक खाते में 22.86 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी कर दी गई. जांच में पता चला कि इस पैसे का इस्तेमाल संतोष कुमार ने चल और अचल संपत्तियां खरीदने में किया.
जांच एजेंसी के अनुसार, संतोष कुमार ने पत्नी के नाम पर इनोवा क्रेटा गाड़ी खरीदने के लिए 26.52 लाख रुपये एक कंपनी में जमा किए थे, लेकिन बाद में गाड़ी लेने नहीं गया.
कैसे शुरू हुआ मामला?
इस घोटाले का खुलासा होने के बाद पेयजल विभाग ने विभागीय स्तर पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी. तत्कालीन कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर की लिखित शिकायत पर सदर थाना में केस दर्ज हुआ था. उस समय प्राथमिकी में 2.71 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी का आरोप लगाया गया था.
पुलिस जांच के बाद केवल संतोष कुमार के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया. इसी आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ECIR दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की.
ED जांच में बड़े खुलासे
ED की जांच में सामने आया कि संतोष कुमार ने जानबूझकर फर्जी निकासी के उद्देश्य से ही यह कंपनी बनाई थी. जांच के दौरान उसके पास से 50.98 लाख रुपये नकद बरामद किए गए.
संतोष कुमार ने अपने बयान में यह भी स्वीकार किया कि 23 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी में से 3 करोड़ रुपये तत्कालीन कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर को दिए गए थे.
घोटाले की रकम से खरीदी गई संपत्तियां
ED की जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी निकासी की रकम से संतोष कुमार ने अन्य अधिकारियों को हिस्सा देने के साथ-साथ अपने लिए कई तरह की संपत्तियां और निवेश किए.
घोटाले की रकम से अर्जित संपत्तियों का विवरण
• नामकुम के चाय बगान इलाके में जमीन खरीदकर घर का निर्माण.
• छापेमारी में घर से 50.98 लाख रुपये नकद बरामद.
• विभिन्न बैंकों में 3.57 करोड़ रुपये जमा.
• 27.74 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)
• 4.18 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी.
• 4.15 लाख रुपये का म्यूचुअल फंड निवेश.
• 1.18 लाख रुपये शेयर बाजार में निवेश.
• पत्नी के नाम पर इनोवा क्रेटा के लिए 26.52 लाख रुपये जमा, लेकिन गाड़ी नहीं ली गई.
फिलहाल, ED इस पूरे घोटाले से जुड़े अन्य अधिकारियों और पैसों के लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है. मामले में आगे और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.