वर्ष 1980 में ओरमांझी के कुचू गांव के बूथ कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुई आदित्य की राजनीतिक यात्रा बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंची।
आदित्य साहू के ओबीसी समुदाय से आने के कारण उनके चयन को सामाजिक संतुलन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके अध्यक्ष बनाए जाने से राज्य भर के पिछड़ा वर्ग के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खासा उत्साह है। भाजपा नेताओं का कहना है कि इससे संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूती मिलेगी।
भाजपा नेताओं का मानना है कि उनके नेतृत्व में संगठनात्मक ढांचा और अधिक मजबूत होगा तथा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होगा। साथ ही उम्मीद जताई गई कि आने वाले दिनों में भाजपा झारखंड में जनमुद्दों को लेकर आक्रामक भूमिका निभाएगी और पार्टी का जनाधार और अधिक विस्तृत होगा।
राष्ट्रीय परिषद के लिए अर्जुन, रघुवर, चंपाई के नाम
राष्ट्रीय परिषद की 21 सीट के लिए कड़िया मुंडा, अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, चंपाई सोरेन, मधु कोड़ा, संजय सेठ, अन्नपूर्णा देवी, अभयकांत प्रसाद, यदुनाथ पांडेय, पशुपति नाथ सिंह, रवींद्र कुमार राय, दिनेशानंद गोस्वामी, दीपक प्रकाश, प्रदीप वर्मा, समीर उरांव, अनंत ओझा, गीता कोड़ा, अमर कुमार बाउरी, नीलकंठ सिंह मुंडा, भानु प्रताप शाही और जीतू चरण राम शामिल हैं।
46 वर्ष बाद बनेंगे प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष 46 वर्ष की लंबी आदित्य साहू की यह राजनीतिक यात्रा धैर्य, संघर्ष, सहयोग, समर्पण और अनुशासन की परिधि में धीरे-धीरे आगे बढ़ी है। राजनीति की बारीकियां और संगठन के दांव-पेंच उन्होंने पूर्व सांसद रामटहल चौधरी से सीखे, पर किसी भी गुट का ठप्पा उन पर नहीं लगा।
वे संयुक्त बिहार में भाजपा के पितामह कैलाशपति मिश्र से लेकर झारखंड के वरीय नेता कड़िया मुंडा, बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, रघुवर दास आदि की छत्रछाया में लगातार काम किया। किसी भी गुट के नहीं होने के बाद भी वे सबके प्रिय बने रहे।
संप्रति वे राज्य सभा सदस्य और प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष हैं, पर पार्टी के बहुसंख्यक कार्यकर्ता उनकी सरलता और सहजता के कायल हैं। कार्यकर्ता कहते हैं, बिना कड़वी बात बोले भी वे सबसे शत प्रतिशत काम करवा लेते हैं। इसीलिए उनका सांगठनिक रिकार्ड अच्छा रहा है। खास कर पलामू प्रमंडल के प्रभारी के रूप में उन्होंने भाजपा को लगातार सफलता दिलाई है।