Jharkhand News: जादूगोड़ा स्थित भारत सरकार के प्रतिष्ठित उपक्रम यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में मकर संक्रांति से ठीक पहले औद्योगिक माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है. नरवा पहाड़ यूरेनियम प्रोजेक्ट से शुरू हुई माइंस बंदी का असर दूसरे दिन जादूगोड़ा प्रोजेक्ट तक पहुंच गया है. ठेका कर्मियों के आंदोलन के कारण कंपनी के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में कामकाज प्रभावित होने लगा है.
मुख्य सड़क जाम, माइंस और प्लांट का रास्ता बंद
ठेका कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर माइंस और प्लांट जाने वाली मुख्य सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया है. सड़क जाम होने से यूसीआईएल का परिचालन ठप पड़ गया है. प्रदर्शन कर रहे कर्मियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. जाम की वजह से पूरे इलाके में अफरा तफरी का माहौल बना हुआ है.
भुगतान की मांग पर अड़े ठेका कर्मी
आंदोलन का नेतृत्व झामुमो के पूर्वी सिंहभूम जिला संयोजक प्रमुख बाघराय मार्डी और मंगल सोरेन कर रहे हैं. ठेका कर्मियों की मुख्य मांग है कि बीते एक वर्ष से लंबित अर्जित छुट्टी (Earned Leave) का नकद भुगतान मकर संक्रांति से पहले किया जाए. कर्मियों का कहना है कि पर्व के समय भी उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है, जिससे उनमें भारी नाराजगी है.
प्रबंधन में हड़कंप, स्थायी कर्मी भी फंसे
अचानक हुए चक्का जाम और हड़ताल से यूसीआईएल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है. सड़क जाम होने के कारण कंपनी के स्थायी कर्मचारी भी प्लांट के भीतर नहीं जा पा रहे हैं. कई कर्मचारी गेट के बाहर खड़े होकर हालात सामान्य होने का इंतजार करते नजर आए. जादूगोड़ा और नरवा पहाड़ जैसी महत्वपूर्ण यूरेनियम परियोजनाओं में काम रुकने से कंपनी को बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है.
विस्थापितों का आंदोलन भी जारी, बढ़ी मुश्किलें
एक ओर ठेका कर्मी अपने भुगतान की मांग पर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी ओर नरवा पहाड़ प्रोजेक्ट में विस्थापितों का आंदोलन भी जारी है. विस्थापितों और ठेका कर्मियों के दोहरे दबाव ने यूसीआईएल अधिकारियों की परेशानी और बढ़ा दी है. समाचार लिखे जाने तक सड़क जाम की स्थिति बनी हुई थी और आंदोलनकारी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं थे.
प्रबंधन और श्रमिकों के बीच बढ़ते असंतोष
मकर संक्रांति जैसे बड़े पर्व से पहले यूसीआईएल में उभरा यह विरोध प्रबंधन और श्रमिकों के बीच बढ़ते असंतोष को दिखाता है. ठेका कर्मियों की अर्जित छुट्टी के भुगतान की मांग लंबे समय से लंबित है, जो अब आंदोलन का रूप ले चुकी है. नरवा पहाड़ और जादूगोड़ा जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण यूरेनियम प्रोजेक्ट्स में काम रुकना न सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है. अगर समय रहते समाधान नहीं निकला तो इसका असर उत्पादन, सुरक्षा और औद्योगिक शांति तीनों पर पड़ सकता