Jharkhand News: झारखंड खनिज संपदा से भरपूर राज्य है. यहां कोयला समेत कई खनिजों का बड़े पैमाने पर उत्खनन होता है. खनन और खनिजों के परिवहन के दौरान उत्पन्न हो रहे प्रदूषण को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. अदालत ने अवैध उत्खनन के मुद्दे पर भी सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं.
वायु प्रदूषण और अवैध खनन पर मांगी गई रिपोर्ट
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं. अदालत ने सरकार को 11 फरवरी तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
ग्रामीण एकता मंच की याचिका पर सुनवाई
इस मामले में ग्रामीण एकता मंच की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. याचिका में धनबाद और आसपास के इलाकों में हो रहे अवैध उत्खनन, नियमों की अनदेखी कर खनिजों के परिवहन और उससे फैल रहे प्रदूषण पर रोक लगाने की मांग की गई है.
बीसीसीएल ने आरोपों से किया इनकार
सुनवाई के दौरान भारत कोकिंग कोल लिमिटेड की ओर से अदालत को बताया गया कि कंपनी किसी भी प्रकार का अवैध उत्खनन नहीं कर रही है. बीसीसीएल ने यह भी कहा कि अवैध खनन पर रोक लगाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है.
प्रदूषण से जुड़े आंकड़े पेश करने का निर्देश
अदालत ने इस प्रकरण में प्रार्थी को समय देते हुए निर्देश दिया है कि वायु प्रदूषण से संबंधित आंकड़ों को तथ्यात्मक और व्यवस्थित तरीके से अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए.
यह मामला झारखंड में खनन गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की गंभीर चुनौती को सामने लाता है. हाईकोर्ट की सख्ती से यह संकेत मिलता है कि अवैध उत्खनन और प्रदूषण के मुद्दे पर जवाबदेही तय की जा सकती है. अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार अपने जवाब में अब तक किए गए कदमों को कितनी मजबूती से अदालत के सामने रख पाती है.