Jamshedpur Big News: जमशेदपुर में टाटानगर स्टेशन के पुनर्विकास को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. स्टेशन चौक से कीताडीह रोड के बीच स्थित 27 दुकानों पर 16 या 17 जनवरी को रेलवे की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हो सकती है. रेलवे प्रशासन ने इस प्रस्तावित अभियान को लेकर जिला प्रशासन को औपचारिक सूचना दे दी है और विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए दंडाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती का अनुरोध किया गया है.
स्टेशन चौक से कीताडीह रोड होते हुए रनिंग रूम तक का इलाका स्टेशन विकास योजना में शामिल
रेलवे अधिकारियों के अनुसार स्टेशन चौक से कीताडीह रोड होते हुए रनिंग रूम तक का इलाका स्टेशन विकास योजना में शामिल है. इसी दायरे में आने वाली दुकानों को हटाने की योजना बनाई गई है. रेलवे को आशंका है कि कार्रवाई के दौरान दुकानदारों की ओर से विरोध या हंगामा हो सकता है. इसी कारण पहले से जिला प्रशासन को सतर्क किया गया है. इससे पहले भी रेलवे इंजीनियरिंग विभाग ने स्थानीय पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल को इस संबंध में पत्र भेजा था लेकिन 5 जनवरी को जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप के बाद अभियान रोक दिया गया था.
रेलवे की जमीन पर लीज के आधार पर वर्षों से 27 दुकानदार कर रहे कारोबार
बताया जा रहा है कि स्टेशन रोड के इस हिस्से में रेलवे की जमीन पर लीज के आधार पर वर्षों से 27 दुकानदार कारोबार कर रहे हैं. स्टेशन विस्तार के नक्शे में इस इलाके के शामिल होने के बाद रेलवे ने सभी लीजधारी दुकानदारों को नोटिस जारी किया था. नोटिस मिलने के बाद दुकानदारों ने सांसद से मुलाकात कर पुनर्वास की मांग उठाई थी और रेलवे अधिकारियों से भी बातचीत की गई थी.
दुकानें टूटने से रोजी-रोजगार पर सीधा असर
दुकानदारों का कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानें तोड़ना उनके रोजी-रोजगार पर सीधा असर डालेगा. जानकारी के अनुसार दुकानदार नोटिस को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी में भी हैं और रेलवे से और समय देने की मांग की गई है. फिलहाल रेलवे प्रशासन कागजी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा है और तय तिथि पर कार्रवाई की संभावना बनी हुई है.
प्रशासन और रेलवे के सामने चुनौती
टाटानगर स्टेशन का पुनर्विकास शहर के लिए जरूरी है लेकिन जिस तरह वर्षों से कारोबार कर रहे दुकानदारों को हटाने की तैयारी की जा रही है उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है. क्या पुनर्विकास के साथ पुनर्वास की जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए. प्रशासन और रेलवे के सामने चुनौती यही है कि विकास और आजीविका के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए. यदि संवाद और वैकल्पिक व्यवस्था के बिना कार्रवाई होती है तो इसका सामाजिक असर भी सामने आ सकता है.