Bihar News: हिजाब विवाद के कारण सुर्खियों में रहीं आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन ने आखिरकार 23 दिन बाद अपनी सरकारी नौकरी जॉइन कर ली है. बुधवार, 7 जनवरी उनका जॉइनिंग का आखिरी दिन था. लंबे समय से उनकी जॉइनिंग को लेकर चल रही अनिश्चितता अब समाप्त हो गई है.
जॉइनिंग की तारीख तीन बार बढ़ानी पड़ी
नुसरत परवीन के लिए जॉइनिंग की अंतिम तिथि पहले 20 दिसंबर तय की गई थी.समय पर योगदान नहीं देने के कारण इसे बढ़ाकर 31 दिसंबर किया गया.इसके बाद भी जॉइनिंग नहीं होने पर सरकार ने एक बार फिर तारीख बढ़ाकर 7 जनवरी कर दी. आज उनका जॉइनिंग का अंतिम मौका था, जिसे उन्होंने उपयोग किया और विभाग में योगदान दे दिया.
हिजाब विवाद के बाद अचानक गायब हुई थीं नुसरत
15 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरित किए थे. इसी कार्यक्रम के दौरान नुसरत परवीन का हिजाब हटाने की घटना सामने आई थी, जिससे विवाद खड़ा हो गया. इस घटना के बाद नुसरत सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आईं और यह सवाल उठने लगा कि वे नौकरी जॉइन करेंगी या नहीं.
सामान्य प्रक्रिया से हटकर हुई जॉइनिंग
आमतौर पर आयुष डॉक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया में पहले विभाग द्वारा नियुक्ति पत्र जारी किया जाता है. इसके बाद चयनित अभ्यर्थी को सिविल सर्जन कार्यालय जाकर दस्तावेजों का सत्यापन कराना होता है. वहीं से डॉक्टर को यह आदेश मिलता है कि उसे किस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में योगदान देना है.
लेकिन नुसरत परवीन ने इस पूरी प्रक्रिया को छोड़ते हुए सीधे आयुष विभाग पहुंचकर जॉइन किया. उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय में रिपोर्ट नहीं की.
अधिकारियों पर बना हुआ था दबाव
सूत्रों के मुताबिक, नुसरत की जॉइनिंग को लेकर प्रशासनिक स्तर पर काफी दबाव था.मामला संवेदनशील होने के कारण अधिकारी किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहते थे.इसी वजह से उनकी जॉइनिंग को लेकर विशेष व्यवस्था की गई और उन्हें सीधे विभाग में योगदान करने की अनुमति दी गई.
नुसरत परवीन की जॉइनिंग के साथ ही हिजाब विवाद से जुड़ा यह मामला फिलहाल शांत होता नजर आ रहा है. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने नियुक्ति प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल भी खड़े किए हैं.