चार घंटे चली अहम बैठक, कई मुद्दों पर हुई चर्चा
इस वार्ता में टाटा स्टील के सीएचआरओ जुबिन पालिया के स्तर पर प्रबंधन पक्ष से बातचीत हुई। वहीं यूनियन की ओर से अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शामिल रहे। करीब चार घंटे तक चली इस बैठक में पुराने वेज स्केल के तहत लगभग चार हजार कर्मचारियों के बढ़ते वेतन खर्च को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।
सैलरी सीलिंग बढ़ाने के बजाय घटाने का प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार, प्रबंधन पक्ष ने यह सुझाव दिया कि 3 प्रतिशत वार्षिक बढ़ोत्तरी के बाद लागू सैलरी सीलिंग को बढ़ाने के बजाय उसे और कम किया जाए। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की सीलिंग 50 हजार रुपये है तो उसे घटाकर 40 हजार रुपये करने पर विचार रखा गया है। प्रबंधन का तर्क है कि लगातार वार्षिक वृद्धि के कारण वेतन लागत तेजी से बढ़ रही है, जिससे कंपनी पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
डीए और प्वाइंट वैल्यू पर भी मतभेद
एनएस ग्रेड कर्मचारियों के महंगाई भत्ते यानी डीए में प्वाइंट वैल्यू बढ़ाने के प्रस्ताव को भी प्रबंधन ने स्वीकार नहीं किया। इस दौरान यह भी कहा गया कि टाटा स्टील समूह की अन्य कंपनियों जैसे टाटा स्टील गम्हरिया, जेसीएपीसीपीएल, टीएसडीपीएल, टाटा बियरिंग, टीआरएफ, सीआरसी वेस्ट और वायर डिवीजन, टाटा कलर्स, टाटा मेटालिक्स, तार कंपनी और टिनप्लेट में डीए प्वाइंट वैल्यू पहले से 2 से 2.50 रुपये के बीच है। ऐसे में यहां अधिक बढ़ोत्तरी संभव नहीं है।
यूनियन ने दर्ज कराया कड़ा विरोध
वार्ता के दौरान यूनियन प्रतिनिधियों ने इन सभी प्रस्तावों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों के हितों से जुड़ी मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया जाना चाहिए। हालांकि चर्चा के बावजूद एमजीबी और डीए प्वाइंट वैल्यू जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी।
नतीजे के बिना वार्ता समाप्त हुई
लंबी चली इस बैठक के बाद भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई और वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। अब आगे की बातचीत में इस रिवीजन समझौते को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद जताई जा रही है।