Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने रेलवे के टिकट परीक्षक समेत वाणिज्यिक और टिकटिंग स्टाफ की वरिष्ठता से जुड़े मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने मामले को दोबारा विचार के लिए ट्रिब्यूनल को भेज दिया है।
2018 में बनाया गया था संयुक्त कैडर
मामला रेलवे के वाणिज्यिक लिपिक, टिकट जांच और पूछताछ-सह-आरक्षण लिपिक पदों पर कार्यरत कर्मचारियों की वरिष्ठता से जुड़ा है। रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2018 में इन पदों को मिलाकर एक संयुक्त वाणिज्यिक एवं टिकटिंग स्टाफ कैडर बनाने का फैसला लिया था। रेलवे ने वर्ष 2019 में स्पष्ट किया था कि 22 फरवरी 2018 तक कार्यरत कर्मचारियों की वरिष्ठता अलग रहेगी, जबकि इसके बाद सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों के लिए संयुक्त वरिष्ठता लागू होगी।
दूसरे मंडल में तबादले के बाद उठा विवाद
मामले में शामिल कुछ कर्मचारी 22 फरवरी 2018 से पहले रेलवे में टिकट परीक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे। बाद में उन्होंने अपनी इच्छा से दूसरे मंडल में तबादला लिया और धनबाद मंडल में योगदान दिया। धनबाद मंडल ने फरवरी 2023 में संयुक्त वरिष्ठता सूची जारी की। कर्मचारियों ने इस सूची का विरोध करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में मामला दायर किया था।
हाईकोर्ट ने रेलवे के नियमों को माना अहम
कैट ने दिसंबर 2025 में सुनवाई के दौरान संयुक्त वरिष्ठता सूची को रद्द कर अलग वरिष्ठता सूची जारी करने का आदेश दिया था। रेलवे ने कैट के इस फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि संबंधित कर्मचारी वर्ष 2018 के बाद अपनी इच्छा से धनबाद मंडल में स्थानांतरित होकर आए थे। ऐसे में उनकी वरिष्ठता को संयुक्त कैडर में रखना रेलवे के नियमों के अनुरूप था। कोर्ट ने कैट के आदेश को रद्द करते हुए मामले का निपटारा कर दिया। इससे रेलवे के संयुक्त वाणिज्यिक एवं टिकटिंग कैडर में कर्मचारियों की वरिष्ठता को लेकर चल रहे विवाद में महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट हुई है।