Ranchi News : झारखंड में शिशु स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS)-2024 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में शिशु मृत्यु दर में पिछले वर्ष की तुलना में कमी दर्ज की गई है। इससे यह माना जा रहा है कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं पर किए गए काम का असर अब दिखाई देने लगा है।
रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में शिशु मृत्यु दर 29 से घटकर 27 हो गई है। शिशु मृत्यु दर का मतलब प्रति एक हजार जीवित जन्म पर एक वर्ष के भीतर होने वाली बच्चों की मौत से है। आंकड़ों में दो अंकों की यह गिरावट राज्य के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।
हालांकि रिपोर्ट में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बड़ा अंतर भी सामने आया है। ग्रामीण इलाकों में सुधार की रफ्तार धीमी रही है। गांवों में शिशु मृत्यु दर 31 से घटकर 29 हुई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह दर 21 से घटकर 18 पर पहुंच गई है।
गांवों में पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अब भी बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता का लाभ ज्यादा मिला है। वहीं ग्रामीण इलाकों में अब भी पोषण, इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बड़ी चुनौती बनी हुई है। यही वजह है कि सरकार की योजनाओं को गांवों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
रिपोर्ट में लड़कों और लड़कियों के बीच भी अंतर देखने को मिला है। राज्य में लड़कों की शिशु मृत्यु दर 26 है, जबकि लड़कियों की दर 27 दर्ज की गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतर और अधिक दिखाई देता है। गांवों में लड़कों की मृत्यु दर 28 है, जबकि लड़कियों की दर 30 दर्ज की गई है। दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में लड़कियों की स्थिति बेहतर रही है। शहरों में फीमेल शिशु मृत्यु दर 16 और मेल शिशु मृत्यु दर 21 दर्ज की गई है।
एक दशक में 27.8 प्रतिशत सुधार, फिर भी राष्ट्रीय औसत से पीछे झारखंड
पिछले एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो झारखंड में शिशु मृत्यु दर में करीब 27.8 प्रतिशत का सुधार हुआ है। वर्ष 2012-24 के दौरान यह दर 37.4 के आसपास थी, जो अब घटकर 27 हो गई है।
हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर सुधार की गति झारखंड से बेहतर रही है। पूरे देश में पिछले एक दशक में शिशु मृत्यु दर में 37.4 प्रतिशत की कमी आई है। राष्ट्रीय औसत अब 40.6 से घटकर 25.4 हो गया है।