Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से जुड़े पीएचडी प्रवेश विवाद में कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को 5 फरवरी को सुबह 10.30 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने यूनिवर्सिटी के शपथ पत्र को प्रथम दृष्टया भ्रामक बताते हुए कहा कि इससे अदालत को गुमराह किया गया है.
किस याचिका से खुला मामला
यह विवाद इंटरनेशनल रिलेशंस विभाग में सत्र 2023-24 के पीएचडी प्रवेश को लेकर सामने आया. याचिकाकर्ता अमित कुमार चौबे ने प्रवेश नीति और सीट आवंटन को चुनौती दी है. उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया.
सीटों को लेकर विरोधाभास
यूनिवर्सिटी ने अगस्त में दाखिल शपथ पत्र में कहा था कि तीन ओबीसी सीटें खाली थीं और उन्हें सामान्य वर्ग को नहीं दिया जा सकता था इसलिए उन्हें अगले सत्र के लिए आगे बढ़ा दिया गया. बाद में याचिकाकर्ता ने सीट मैट्रिक्स पेश करते हुए बताया कि कुल 6 सीटें थीं जिनमें 4 ओबीसी और 1 सामान्य वर्ग की थी. कोर्ट ने दोनों बयानों को परस्पर विरोधी मानते हुए इसे भ्रामक बताया.
आरक्षण नियमों पर सवाल
याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी भी संस्थान में यदि आरक्षित वर्ग का योग्य उम्मीदवार नहीं है तो सीट खाली नहीं छोड़ी जा सकती. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों के अनुसार ऐसी सीटें मेरिट के आधार पर भरी जानी चाहिए. इसी आधार पर उन्होंने सीटों को अगले सत्र में ले जाने को नियम विरुद्ध बताया है. कोर्ट ने रजिस्ट्रार से व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण मांगा है. मामले में अगली सुनवाई के बाद यह तय होगा कि यूनिवर्सिटी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी.
यह मामला केवल एक प्रवेश विवाद नहीं बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण नियमों और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. कोर्ट की सख्ती यह संकेत देती है कि किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी को अब गंभीरता से लिया जाएगा और जवाबदेही तय की जाएगी.