Jharkhand News: झारखंड में मानव तस्करी का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. रेल पुलिस की सतर्कता से उन तस्करों की साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जो फर्जी जॉइनिंग लेटर और नकली आधार कार्ड बनवाकर गरीब लड़कियों को तमिलनाडु के तिरुपुर भेज रहे थे. जांच में खुलासा हुआ कि इन लड़कियों में कई नाबालिग भी शामिल थीं.
कैसे खुला मामला?
यह मामला मई 2025 में सामने आया, जब धनबाद रेल मंडल में रेल पुलिस को कुछ युवतियों की आवाजाही संदिग्ध लगी. छापेमारी के दौरान पुलिस ने तीन लोगों — सुमित कुमार, बेबी देवी और अंजनी कुमारी को गिरफ्तार किया. इनके कब्जे से 17 लड़कियों को मुक्त कराया गया.
जांच में सामने आई सच्चाई
रेल पुलिस की आगे की जांच में पता चला कि इन 17 लड़कियों में से आठ नाबालिग थीं. तस्करों ने इन बच्चियों को बालिग साबित करने के लिए उनके फर्जी आधार कार्ड बनवाए थे. दस्तावेजों में उनकी उम्र बढ़ाकर दिखाई गई, ताकि उन्हें बिना किसी कानूनी परेशानी के राज्य से बाहर ले जाया जा सके.
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजी अनिल पालटा के निर्देश पर विस्तृत जांच शुरू की गई. मेडिकल जांच में भी एक बच्ची के नाबालिग होने की पुष्टि हो चुकी है.
स्किल डेवलपमेंट के नाम पर गुमराह
गिरफ्तार तस्करों ने पुलिस को बताया कि ये सभी लड़कियां झारखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन सोसाइटी के तहत सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण ले चुकी हैं. उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु के तिरुपुर स्थित एसपी अपेरल लिमिटेड नाम की कंपनी से इन लड़कियों को नौकरी के लिए आधिकारिक जॉइनिंग लेटर मिला है.
जॉइनिंग लेटर भी निकले फर्जी
जब पुलिस ने कंपनी और दस्तावेजों की पड़ताल की, तो बड़ा खुलासा हुआ. जांच में सामने आया कि कंपनी के नाम पर दिए गए सभी जॉइनिंग लेटर नकली थे. नाबालिग लड़कियों के आधार कार्ड और अन्य कागजात में छेड़छाड़ कर उन्हें बालिग दिखाया गया था.
अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि झारखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन सोसाइटी का नाम केवल एक बहाना था या इस नाम से वास्तव में कोई संस्था काम कर रही है. यदि संस्था अस्तित्व में है, तो उसकी भूमिका की भी जांच की जाएगी.
पुलिस की कार्रवाई जारी
रेल पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है. आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से गरीब परिवारों की लड़कियों को रोजगार का झांसा देकर दूसरे राज्यों में भेज रहा था. पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है.
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि रोजगार के नाम पर मानव तस्करी के गिरोह किस तरह भोले-भाले परिवारों को निशाना बना रहे हैं. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नौकरी के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें.