Jharkhand News: नगर निगम चुनाव इस बार अलग रंग में नजर आ रहा है. पार्षद पद के लिए शहर के 53 वार्डों से कुल 360 उम्मीदवार मैदान में हैं. इन सभी के शपथ पत्रों के अध्ययन से यह तथ्य सामने आया है कि लगभग 95 प्रतिशत प्रत्याशियों की सालाना आमदनी सात लाख रुपये से कम है. इससे साफ होता है कि इस बार चुनाव में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं और अपने-अपने इलाकों में सक्रिय रहे हैं.
चार लाख से कम आय वाले भी काफी
दाखिल हलफनामों के अनुसार करीब 20 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपनी वार्षिक आय चार लाख रुपये से भी कम बताई है. वहीं लगभग आधे प्रत्याशियों ने आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल नहीं किया है. जानकारी के मुताबिक इनमें ज्यादातर वे लोग शामिल हैं, जिनकी आमदनी कर योग्य सीमा से नीचे है या जो छोटे व्यवसाय, स्वरोजगार, मजदूरी या घरेलू कार्यों से जुड़े हैं. इस बार बड़ी संख्या में गृहिणियां भी पार्षद पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं और अपने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश कर रही हैं.
स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित है मुकाबला
जानकारों का कहना है कि नगर निगम चुनाव में बड़े खर्च से ज्यादा स्थानीय पहचान और जनसंपर्क की अहम भूमिका होती है. यहां चुनावी मुद्दे सड़क, नाली, पानी की आपूर्ति, सफाई व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं होती हैं. ऐसे में कम आय वाले उम्मीदवार भी अपने सामाजिक जुड़ाव और क्षेत्रीय प्रभाव के आधार पर मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
हलफनामों से बढ़ी पारदर्शिता
चुनाव के दौरान जमा किए गए शपथ पत्रों में आय और संपत्ति का विवरण सार्वजनिक होने से मतदाताओं को उम्मीदवारों की आर्थिक स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल रही है. इससे पारदर्शिता बढ़ी है और लोगों को सही फैसला लेने में सहूलियत हो रही है. मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि इस बार नगर निगम चुनाव में आम नागरिकों की भागीदारी पहले से अधिक मजबूत हुई है और स्थानीय राजनीति में सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले चेहरों की संख्या बढ़ी है.