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  • 2026-02-17

Jharkhand News: झारखंड में NDPS कोर्ट की कमी से ढीली पड़ रही नशे पर लगाम, हजारों मामले लंबित

Jharkhand News: झारखंड में नशीले पदार्थों के बढ़ते कारोबार के बीच अब तक अलग से NDPS विशेष अदालतें पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी हैं. इसका सीधा फायदा नशा तस्करों को मिल रहा है. बड़ी संख्या में मामले दर्ज होने के बावजूद आरोपियों को जल्द सजा नहीं मिल पा रही है और कई आरोपी जेल से आसानी से जमानत पर छूट जा रहे हैं.


सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी अधूरा अमल

साल 2022 में Supreme Court of India ने NDPS मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने का निर्देश दिया था. इसके बाद Jharkhand High Court के निर्देश पर राज्य सरकार को रांची, चतरा, खूंटी, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पलामू, गढ़वा, हजारीबाग, गिरिडीह, लातेहार और धनबाद में NDPS एक्ट के तहत विशेष न्यायालय बनाने का प्रस्ताव भेजा गया.

हालांकि, गृह विभाग ने इनमें से सिर्फ पांच जिलों को मंजूरी दी. चतरा में विशेष अदालत का भवन भी बनकर तैयार है, लेकिन वहां अब तक विशेष न्यायाधीश और स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो सकी है. मामला अभी भी गृह विभाग में लंबित है 

क्या है NDPS एक्ट?
देश में नशीले पदार्थों के अवैध निर्माण, बिक्री, खरीद और सेवन को रोकने के लिए लागू कानून को Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS एक्ट) कहा जाता है.

इस कानून के तहत दो तरह के पदार्थ आते हैं:
• नारकोटिक (मादक पदार्थ)
• साइकोट्रोपिक (मनोदैहिक पदार्थ)

इनका अवैध उपयोग प्रतिबंधित है, हालांकि कुछ पदार्थों का सीमित उपयोग चिकित्सकीय जरूरतों के लिए अनुमति के साथ किया जाता है. बिना डॉक्टर की सलाह इनके सेवन से लत लगने का खतरा बढ़ता है.

इस एक्ट में हेरोइन, चरस, गांजा, कोकीन, ब्राउन शुगर, अफीम, पोस्ता, मैंड्रेक्स, कोडीन युक्त कफ सिरप जैसे पदार्थ शामिल हैं 

तीन साल में 5473 अपराधी गिरफ्तार
झारखंड CID के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में NDPS मामलों में 5473 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 86 महिलाएं शामिल हैं. इस दौरान लगभग 335 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए.

मामलों में तेज वृद्धि
• 2020–2022: कुल 1644 मामले दर्ज
• 2023 से अब तक: 4534 मामले दर्ज

यह दर्शाता है कि हाल के वर्षों में मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है.

वर्षवार आंकड़े
साल 2023

• 1023 मामले दर्ज
• 1224 गिरफ्तार
• 9 अपराधी जिलाबदर
• 180 दागी घोषित
• 258 का नाम गुंडा पंजी में दर्ज
• जब्त मादक पदार्थों की अनुमानित कीमत: लगभग 97.55 करोड़ रुपये

साल 2024

• 1422 मामले दर्ज
• 1724 गिरफ्तार
• 26 जिलाबदर
• 275 दागी
• 167 का नाम गुंडा पंजी में दर्ज
• जब्त मादक पदार्थों की कीमत: लगभग 115.23 करोड़ रुपये

साल 2025
• 2089 मामले दर्ज
• 2512 गिरफ्तार
• 67 जिलाबदर
• 345 दागी
• 567 का नाम गुंडा पंजी में दर्ज
• जब्त मादक पदार्थों की कीमत: लगभग 122.45 करोड़ रुपये

अफीम खेती के खिलाफ अभियान
वर्ष 2023 से 2025 के बीच विशेष रूप से खूंटी और चतरा में अवैध अफीम और पोस्ता की खेती के खिलाफ बड़े अभियान चलाए गए.

कुल 36,84,347 एकड़ भूमि में लगी अवैध अफीम की खेती को ट्रैक्टर और अन्य मशीनों से नष्ट किया गया.

इस दौरान 987 मामले दर्ज किए गए और 345 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. लेकिन साक्ष्य और गवाहों की कमी के कारण कई आरोपी संदेह का लाभ लेकर छूट गए. इनमें करीब 112 ऐसे लोग हैं, जो बार-बार जेल से छूटकर फिर इसी धंधे में लौट आते हैं.

SoP का पालन नहीं होने से कमजोर पड़ते हैं केस
विशेषज्ञों का मानना है कि गिरफ्तारी और जब्ती के दौरान तय प्रक्रिया (SoP) का पूरी तरह पालन नहीं होने से भी कई मामलों में आरोपी छूट जाते हैं.

जरूरी प्रक्रियाएं
• ड्रग डिटेक्शन किट से नमूना जांच
• बरामदगी की स्पष्ट मात्रा का उल्लेख
• जब्ती सूची का सत्यापन
• तलाशी की वीडियोग्राफी

यदि इन नियमों का सख्ती से पालन हो और मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में हो, तो दोषियों को कड़ी सजा दिलाना आसान हो सकता है.
झारखंड में नशे के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन विशेष NDPS अदालतों की कमी और जांच प्रक्रिया में खामियों के कारण सजा की दर प्रभावित हो रही है. ऐसे में राज्य में जल्द विशेष न्यायालयों की स्थापना और प्रक्रियाओं के सख्त पालन की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके.

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