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  • 2026-02-15

Jharkhand News: झारखंड निकाय चुनाव, गड़बड़ी करने वालों पर कसेगा शिकंजा, बूथ लूटने पर 5 साल की जेल

Jharkhand News: झारखंड में इस बार नगर निकाय चुनाव बैलेट पेपर के जरिए आयोजित किए जा रहे हैं. मतदान की शुचिता बनाए रखने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं. आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान केंद्रों पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

चुनावी अपराध और सजा के सख्त प्रावधान
आयोग के निर्देशों के अनुसार, मतदान केंद्र पर कब्जा करने या बैलेट पेपर लूटने जैसी घटनाओं में शामिल दोषियों को एक से पांच वर्ष तक के कारावास की सजा भुगतनी होगी. यदि कोई व्यक्ति मतदान केंद्र से बैलेट पेपर हटाता है, तो उसे एक साल की जेल या जुर्माना हो सकता है. इसके अलावा, मतदान केंद्रों पर दुर्व्यवहार या गलत आचरण करने पर तीन महीने की कैद और आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है. चुनाव के दौरान मतदाताओं को डराने-धमकाने या प्रलोभन देने पर भी न्यूनतम एक वर्ष की सजा दी जाएगी.

चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नियम और भी कठोर हैं. यदि कोई सरकारी कर्मी बूथ कैप्चरिंग या किसी अन्य चुनावी कदाचार में संलिप्त पाया जाता है, तो उसे कम से कम तीन वर्ष की जेल होगी. इसके साथ ही, संबंधित कर्मी के विरुद्ध विभागीय जांच भी चलाई जाएगी, जिससे उसकी सेवा समाप्त होने या नौकरी जाने का खतरा बना रहेगा. यह नियम सभी मतदान और गणना अभिकर्ताओं पर भी समान रूप से प्रभावी होगा.

सुरक्षा घेरा और अन्य पाबंदियां
निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदान केंद्रों के आसपास हथियार ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा, जिसका उल्लंघन करने पर दो साल की सजा हो सकती है. आयोग ने यह भी साफ किया है कि चुनाव से संबंधित भ्रामक या गलत बयानबाजी करने वालों को भी दंडित किया जाएगा. इन उपायों का उद्देश्य बैलेट पेपर आधारित चुनाव प्रक्रिया को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है.

सुदृढ़ चुनावी सुरक्षा का संकल्प
झारखंड निर्वाचन आयोग की यह सख्ती बैलेट पेपर आधारित चुनाव में संभावित धांधली को रोकने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है. सरकारी कर्मचारियों के लिए अधिक कठोर दंड और नौकरी जाने का प्रावधान प्रशासन की जवाबदेही तय करता है, जिससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता आने की उम्मीद है. यह कड़े नियम न केवल असामाजिक तत्वों के लिए चेतावनी हैं, बल्कि आम मतदाताओं में विश्वास जगाने का कार्य भी करते हैं कि उनका मत पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष वातावरण में दर्ज होगा.
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