Jamshedpur News : परसुडीह के गदड़ा में शुक्रवार को पारंपरिक सेंदरा पर्व को लेकर उत्साह चरम पर दिखा, जब दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने 27 अप्रैल को पर्व मनाने की घोषणा की। घोषणा से पहले उनके आवास पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई, जिसमें दलमा माई, वन देवता, ग्राम देवता और इष्ट देवता का आह्वान किया गया। मांदर और धमसे की गूंज के बीच संपन्न इस पूजा ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। पूजा के उपरांत गिरा सकम (निमंत्रण) जारी कर पर्व की तिथि का औपचारिक ऐलान किया गया, जिससे घर में उत्सव जैसा माहौल बन गया।
दलमा बुरू सेंदरा समिति की बैठक भी आयोजित की गई
इसी क्रम में दलमा बुरू सेंदरा समिति की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें कई प्रमुख सदस्य शामिल हुए। बैठक में तय हुआ कि दलमा राजा के घर पूजा के बाद अब गांव-गांव जाकर ग्राम देवताओं की पूजा की जाएगी। जानकारी दी गई कि सेंदरा पर्व की शुरुआत सरायकेला-खरसावां के नारनबेड़ा से होगी, इसके बाद दलमा क्षेत्र और फिर पश्चिम बंगाल के पुरूलिया स्थित अयोध्या पहाड़ में इसका आयोजन किया जाएगा।
सेंदरा पर्व से जुड़ी परंपराएं इसकी विशेष पहचान हैं। शिकार के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसे समाज में शहीद का सम्मान दिया जाता है और अंतिम संस्कार जंगल में ही किया जाता है। इस दौरान उनकी पत्नियां सिंदूर नहीं लगातीं और पति के सुरक्षित लौटने के बाद ही पुनः शृंगार करती हैं।
निमंत्रण के रूप में गिरा सकम खजूर के पत्तों से तैयार कर झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के गांवों में भेजा जाएगा। 26 अप्रैल को फदलोगोड़ा में विशेष पूजा होगी, जिसके बाद रात में ही शिकारी दल दलमा की ओर प्रस्थान करेंगे। यह पर्व परंपरा, आस्था और सामुदायिक एकता का अनोखा संगम है।