Jamshedpur: ग्रीन वाटिका हाउसिंग प्रोजेक्ट के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की कथित ठगी और धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार बिल्डर अजय अग्रवाल को अदालत से राहत नहीं मिली। प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडे ने शुक्रवार को उसकी जमानत अर्जी अस्वीकृत कर दी। अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद अजय अग्रवाल को इस कथित ठगी कांड का मास्टरमाइंड मानते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया। इससे पहले मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत भी उसकी बेल याचिका खारिज कर चुकी थी।
ग्रीन वाटिका प्रोजेक्ट के नाम पर करोड़ों की ठगी का आरोप
मामले में आरोप है कि गम्हरिया और आदित्यपुर क्षेत्र में ग्रीन वाटिका हाउसिंग प्रोजेक्ट के नाम पर लोगों को घर और फ्लैट देने का सपना दिखाया गया। इसी भरोसे पर कई लोगों से करोड़ों रुपये लिए गए, लेकिन बाद में उन्हें न तो वादा किया गया घर मिला और न ही पैसा वापस किया गया। बताया जा रहा है कि इस तरीके से लगभग 40 से 50 करोड़ रुपये जुटाए गए। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रकम इकट्ठा करने के बाद अजय अग्रवाल अपने परिवार के साथ यहां से फरार हो गया था।
रांची के होटल से हुई थी गिरफ्तारी
साकची पुलिस ने गत 17 मार्च को अजय अग्रवाल को रांची के एक बड़े होटल से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। शंकर अग्रवाल द्वारा दर्ज कराए गए मामले में यह गिरफ्तारी हुई थी। इसके अलावा साकची, आदित्यपुर, कदमा और अन्य क्षेत्रों में भी उसके खिलाफ कई मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। चेक बाउंस से जुड़े केस भी उस पर लंबित हैं।
अधूरी केस डायरी भेजने पर अदालत ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष की कार्यशैली पर भी टिप्पणी की। जानकारी के अनुसार अजय अग्रवाल की ओर से दबाव बनाकर पुलिस द्वारा आधी-अधूरी केस डायरी अदालत में भेजी गई थी। इस पर न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए अद्यतन केस डायरी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और यह भी पूछा कि किसके दबाव में अधूरी डायरी भेजी गई। बाद में अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।
राजनीतिक संबंधों की भी हो रही चर्चा
जानकारी के अनुसार अजय अग्रवाल आदित्यपुर के उद्यमी और भाजपा राजनीति से जुड़े इंदर अग्रवाल का भतीजा है। इस पूरे मामले में पर्दे के पीछे से अजय अग्रवाल के बचाव में उनका नाम अग्रगणी बताया जा रहा है।