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  • 2026-03-31

Health Tips: पैरों में जलन और झनझनाहट को न लें हल्के में, ये हो सकती हैं गंभीर बीमारी की चेतावनी

Health Tips: अगर आपको रात के समय पैरों में जलन, झुनझुनी या सुई चुभने जैसा एहसास होता है, तो इसे सिर्फ थकान समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. डॉक्टरों के अनुसार यह समस्या कई बार शरीर के अंदर चल रही बड़ी बीमारी का शुरुआती संकेत होती है. ऐसे में समय रहते इसके कारणों को समझना बेहद जरूरी है.
बर्निग फीट सिंड्रोम क्या है
जब पैरों में लगातार जलन, गर्माहट या झनझनाहट महसूस होती है, तो इसे बर्निंग फीट सिंड्रोम कहा जाता है. यह समस्या तब पैदा होती है जब पैरों की नसें ठीक से काम नहीं कर पातीं या उनमें सूजन आ जाती है. अक्सर यह परेशानी रात में ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे नींद खराब होती है और व्यक्ति बेचैनी महसूस करता है.

डायबिटीज और किडनी की समस्या से जुड़ाव
लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर पैरों की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है. इस स्थिति को पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है, जिसमें जलन के साथ सुन्नपन भी महसूस होता है. इसके अलावा किडनी ठीक से काम न करने पर शरीर में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं, जो नसों को प्रभावित कर पैरों में जलन पैदा कर सकते है.

विटामिन की कमी और हार्मोनल बदलाव
शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी इस समस्या की बड़ी वजह बन सकती है. खासकर विटामिन बी12 की कमी से नसें कमजोर हो जाती हैं और जलन या झनझनाहट बढ़ जाती है. थायरॉयड हार्मोन का असंतुलन भी शरीर की गतिविधियों को धीमा कर देता है, जिससे पैरों में असहजता महसूस होती है.

खराब लाइफस्टाइल भी बढ़ाता है जोखिम
पैरों में जलन सिर्फ बीमारी की वजह से ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों से भी हो सकती है. लंबे समय तक खड़े रहना, टाइट जूते पहनना, ज्यादा पसीना आना या फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याएं इसे और बढ़ा देती हैं. ब्लड सर्कुलेशन कमजोर होने पर भी पैरों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे जलन और दर्द बढ़ सकता है.

कब सतर्क होना जरूरी है
अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, लंबे समय तक बनी रहती है या इसके साथ दर्द और सुन्नपन भी महसूस हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. शुरुआती जांच से बड़ी बीमारी को समय रहते पकड़ा जा सकता है.

पैरों में जलन को मामूली समझकर टालना सही नहीं है. यह शरीर का एक चेतावनी संकेत हो सकता है. सही समय पर ध्यान देकर और जीवनशैली में सुधार कर इस समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है.
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