Dhanbad News: कोल इंडिया लिमिटेड की आक्रामक बाजार विस्तार रणनीति के तहत भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) द्वारा लागू की गई कोयला छूट योजना का सकारात्मक असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है. कंपनी की ओर से 100 रुपये से 600 रुपये प्रति टन तक दी जा रही छूट के बाद बीते एक महीने में ई-आक्शन के माध्यम से कोयला उठाव में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.
कोयला स्टॉक में आई उल्लेखनीय कमी
कोयला उठाव बढ़ने के साथ ही बीसीसीएल के यार्डों में जमा कोयले के स्टॉक में भी तेजी से कमी आई है. बुधवार को कोल इंडिया के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के समक्ष कंपनी प्रबंधन ने इस उपलब्धि की जानकारी साझा की. प्रबंधन के अनुसार नई नीति का सीधा लाभ बाजार में दिखाई दे रहा है.
स्पंज आयरन, सीमेंट और पावर सेक्टर ने बढ़ाई खरीदारी
छूट योजना लागू होने के बाद स्पंज आयरन, कैप्टिव पावर प्लांट और सीमेंट उद्योग से जुड़े खरीदारों ने कोयले की खरीद बढ़ा दी है. पहले भुगतान और डिलीवरी से जुड़ी कड़ी शर्तों के कारण छोटे उपभोक्ता पीछे रह जाते थे, लेकिन नीति में राहत मिलने से अब उनकी भागीदारी भी बढ़ी है.
झरिया के कोयले की मांग में उछाल
झरिया कोलफील्ड के मीडियम कोकिंग और वॉशरी ग्रेड कोयले की मांग में विशेष वृद्धि दर्ज की गई है. 400 से 600 रुपये प्रति टन तक की छूट मिलने के बाद इस श्रेणी के कोयले का तेजी से उठाव हो रहा है. पहले यही कोयला लंबे समय तक यार्ड में पड़ा रहता था.
रिजेक्ट कोयले की बिक्री से बढ़ा राजस्व
बीसीसीएल की संशोधित नीति का असर वॉशरी रिजेक्ट कोयले की बिक्री पर भी पड़ा है. जो रिजेक्ट कोयला पहले यार्ड में जमा रहता था, अब उसे विभिन्न पावर प्लांट खरीद रहे हैं. इससे कंपनी को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो रहा है और कोयला डंपिंग से होने वाला पर्यावरणीय दबाव भी कम हुआ है.
आने वाले महीनों में और बढ़ सकता है डिस्पैच
बीसीसीएल प्रबंधन का मानना है कि छूट योजना स्टॉक कम करने और बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में प्रभावी साबित हो रही है. कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में कोयला डिस्पैच में और तेजी आएगी, जिससे उत्पादन और बिक्री से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करना आसान होगा.