Current News : विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 यानी FCRA बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव बुधवार को लोकसभा में मंजूर हो गया। यह फैसला विपक्ष के विरोध के बीच लिया गया। बिल को अब दोनों सदनों की संयुक्त संसदीय समिति विस्तार से जांचेगी।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने FCRA बिल को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया था। विपक्षी दलों ने बिल का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिल को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया, जबकि कांग्रेस ने भी इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई।
कांग्रेस ने NGO और अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाने का लगाया आरोप
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य ऐसे NGO और अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाना है जो सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहे हैं। विपक्ष ने सरकार से बिल वापस लेने की मांग की।
वहीं, केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर किसी सदस्य को बिल के किसी प्रावधान पर आपत्ति है, तो वह JPC के सामने अपनी बात रख सकता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष खुद महत्वपूर्ण विधेयकों को JPC के पास भेजने की मांग करता रहा है।
31 सदस्यीय JPC करेगी बिल की जांच
FCRA संशोधन विधेयक की जांच के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति गठित की जाएगी। इसमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। समिति दोनों सदनों के सदस्यों की भागीदारी के साथ बिल के प्रावधानों पर विचार करेगी।
प्रस्तावित संशोधन FCRA के तहत विदेशी योगदान प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल से जुड़े नियमों को प्रभावित करता है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ाना और राष्ट्रीय हितों से जुड़े जोखिमों पर निगरानी मजबूत करना है। अब JPC बिल के विभिन्न प्रावधानों की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में पेश करने का लक्ष्य रखा गया है।