Chaibasa: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रविवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर प्रखंड की टेकराहातु पंचायत में ग्रामीणों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को सुना। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुवर गागराई, भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता जे.बी. तुबिड सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने, आत्मनिर्भर भारत, स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन, युवाओं की भागीदारी और देश निर्माण में आम लोगों की भूमिका जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ समाज को सकारात्मक दिशा देने और लोगों को प्रेरित करने वाला मंच बन चुका है।
भाजपा जिला अध्यक्ष का जाना हालचाल
चाईबासा प्रवास के दौरान बाबूलाल मरांडी पूर्व मंत्री बड़कुवर गागराई के आवास भी पहुंचे, जहां उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने भाजपा जिला अध्यक्ष गीता बालमुचु के घर जाकर उनका हालचाल लिया। कुछ दिन पहले सड़क दुर्घटना में घायल हुईं गीता बालमुचु के शीघ्र स्वस्थ होने की उन्होंने कामना की। सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि पिछले करीब दस वर्षों में पश्चिमी सिंहभूम जिले को जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के माध्यम से 3000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली, लेकिन उसका अपेक्षित उपयोग नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि इस फंड का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास करना था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका लाभ लोगों तक नहीं पहुंचा।
ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर उठाए सवाल
मरांडी ने आरोप लगाया कि आज भी गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होती, रोजगार के अवसर सीमित हैं और बड़ी संख्या में युवा व महिलाएं पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के दावे तो करती है, लेकिन पहले से स्थापित उद्योगों को भी बचाने में सफल नहीं रही। उन्होंने झींकपानी स्थित उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार की नीतियों के कारण औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। साथ ही उन्होंने सारंडा क्षेत्र में वन पट्टा वितरण और खनन प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने में हो रही देरी का भी मुद्दा उठाया। बालू घाटों और अन्य लघु खनिजों की नीलामी प्रक्रिया को लेकर उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों से यह प्रक्रिया लंबित रहने के कारण अवैध खनन को बढ़ावा मिला है और सरकार को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि शाह आयोग की रिपोर्ट के बाद बंद हुई कई लौह अयस्क खदानें ओडिशा में फिर से चालू हो गईं, जबकि झारखंड में अब भी कई खदानें बंद हैं।
पेपर लीक और केंद्र-राज्य संबंधों पर रखी राय
केंद्र सरकार की भूमिका से जुड़े सवालों पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भारत का संघीय ढांचा राज्यों के अधिकारों का सम्मान करता है और केंद्र तभी हस्तक्षेप करता है जब राज्य सरकार इसकी अनुशंसा करती है। पेपर लीक के मामलों पर उन्होंने कहा कि केंद्र ने ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई कर दोबारा परीक्षाएं कराईं, जबकि झारखंड में शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। उनका कहना था कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को अधिक जवाबदेह होना चाहिए। प्रेस वार्ता और अन्य कार्यक्रमों में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुवर गागराई, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता जे.बी. तुबिड, पूर्व जिला अध्यक्ष संजय पांडे, सतीश पुरी, जिला महामंत्री भूषण पाट पिंगुवा समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला मीडिया प्रभारी जितेंद्र नाथ ओझा ने किया। इसके अलावा चंदन झा, चंद्रमोहन तिऊ, रूपा दास, राजश्री बांनरा, राकेश सिंह बबलू, हेमंत केसरी, हर्स रवानी, संजय अखाड़ा, राकेश पोद्दार, तरुण सवैया सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।