BREAKING: टाटा स्टील को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है. अदालत ने कंपनी के खिलाफ जारी किए गए 493.35 करोड़ रुपये के जीएसटी (GST) डिमांड नोटिस पर फिलहाल रोक लगा दी है. इस आदेश के बाद विभाग द्वारा जुर्माने और ब्याज वसूली से जुड़ी सभी आगामी कार्यवाहियों को भी स्थगित कर दिया गया है. सीजीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क, जमशेदपुर के आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी इस डिमांड के खिलाफ टाटा स्टील ने रिट याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कंपनी के पक्ष में यह अंतरिम फैसला सुनाया है.
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को लेकर उपजा 5 वर्षों का विवाद
यह पूरा मामला वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक की अवधि के दौरान इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की कथित अस्वीकृति से संबंधित है. जीएसटी विभाग ने कंपनी द्वारा लिए गए कुछ आईटीसी लाभों को नियमों के विरुद्ध बताते हुए भारी टैक्स और जुर्माने की मांग की थी. वहीं, टाटा स्टील का पक्ष है कि उसने अपने नियमित व्यावसायिक संचालन के दौरान सभी कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए ही आईटीसी का दावा किया है. कंपनी ने जानकारी दी है कि वह विवादित अवधि के लिए पहले ही 514.19 करोड़ रुपये जमा कर चुकी है.
18 दिसंबर के आदेश को हाई कोर्ट में दी गई थी चुनौती
टाटा स्टील ने 18 दिसंबर 2025 को विभाग द्वारा पारित प्रतिकूल आदेश के खिलाफ 11 मार्च 2026 को झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. याचिका में दलील दी गई थी कि विभाग की मांग प्रक्रियात्मक और कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण है. हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और जमा की गई राशि को देखते हुए विभाग को फिलहाल कोई भी कड़ी कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है. इस बड़े वित्तीय मामले ने औद्योगिक जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर टैक्स क्रेडिट के दावों की व्याख्या से जुड़ा है.
15 अप्रैल को होगी मामले की अगली सुनवाई
जीएसटी कानून के तहत दोहरे कराधान से बचने के लिए कंपनियां अपनी खरीद पर दिए गए टैक्स का क्रेडिट लेती हैं. टाटा स्टील के मामले में विभाग द्वारा इसे अमान्य घोषित करने के बाद अब गेंद न्यायालय के पाले में है. हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 15 अप्रैल 2026 की तारीख निर्धारित की है. तब तक के लिए कंपनी को किसी भी बड़ी वित्तीय वसूली से सुरक्षा मिल गई है. जमशेदपुर के औद्योगिक हलकों में इस स्थगन आदेश को टाटा स्टील के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है.