Adityapur: झारखंड के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित टाटा 6स्टील की स्ट्रेट बार मिल, जिसे पहले उषा मार्टिन के नाम से जाना जाता था, उसको बुधवार 31 दिसंबर से अचानक बंद कर दिया गया। इस फैसले के चलते लगभग 700 मजदूर एक झटके में बेरोजगार हो गए।
मिल बंद होने की जानकारी मिलते ही कामगारों में भारी नाराजगी फैल गई। बुधवार सुबह जब कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर पहुंचे तो गेट पर ताला लगा मिला। इससे आक्रोशित होकर मजदूरों ने मिल के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन शुरू कर दिया और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।
कामगारों का आरोप है कि कंपनी ने बिना किसी पूर्व सूचना के प्लांट बंद कर दिया, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। कई मजदूर ऐसे हैं जो वर्ष 1999 से यहां काम कर रहे थे और उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इस कारखाने को दे दी। अब इस उम्र में उनके सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
कर्मचारियों ने यह भी बताया कि प्लांट बंद करने से पहले न तो उनका बकाया वेतन दिया गया और न ही ग्रेच्युटी व अन्य वैधानिक सुविधाओं का भुगतान किया गया। जब टाटा स्टील ने उषा मार्टिन के इस प्लांट का अधिग्रहण किया था, तब यह आश्वासन दिया गया था कि उत्पादन जारी रहेगा और किसी भी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी।
फिलहाल यह यूनिट वेंडर कंपनी आरके एंटरप्राइजेज के माध्यम से संचालित की जा रही थी, जिसके अंतर्गत करीब 165 मजदूर कार्यरत थे। इसके अलावा अन्य ठेकेदारों के अधीन काम करने वाले श्रमिकों को मिलाकर कुल मिलाकर 600 से अधिक लोग बेरोजगार हो गए हैं।
मजदूरों ने अपनी तीन मुख्य मांगें रखी हैं
मिल का संचालन फिर से शुरू किया जाए।
यदि प्लांट स्थायी रूप से बंद किया जा रहा है तो कामगारों को वर्तमान वेतनमान पर अन्य कंपनियों में समायोजित किया जाए।
31 दिसंबर तक का समस्त बकाया वेतन, ग्रेच्युटी और अन्य लाभों का तत्काल भुगतान किया जाए।
आरके एंटरप्राइजेज ने अपने अधीन कर्मचारियों को भुगतान की बात कही
इस पूरे मामले पर वेंडर कंपनी आरके एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि उनके अधीन काम करने वाले मजदूरों की बकाया राशि का भुगतान करने के लिए वह तैयार हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो कर्मचारी पहले से कार्यरत थे, उनके बकाये की जिम्मेदारी उनकी नहीं बनती।
राजेश कुमार के अनुसार मिल बंद होने के साथ ही 31 दिसंबर को उनका वेंडर कॉन्ट्रैक्ट भी समाप्त हो गया है, इसलिए वह
केवल अपने अनुबंध के दायरे में आने वाले श्रमिकों के भुगतान के लिए ही उत्तरदायी हैं।