Bihar News: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद से प्रशासनिक स्तर पर लगातार फेरबदल जारी है. मंगलवार को नए साल से पहले एक बार फिर कई आईएएस अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग की गई. इस सूची में वरिष्ठ अधिकारियों को अहम विभागों की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है.
संजीव हंस का निलंबन समाप्त, नई तैनाती
तबादले की सूची का सबसे चर्चित फैसला आईएएस संजीव हंस को लेकर सामने आया है. राज्य सरकार ने उनका निलंबन समाप्त कर दिया है और उन्हें राजस्व परिषद का अपर सदस्य नियुक्त किया गया है. लंबे समय बाद प्रशासन में उनकी वापसी को लेकर नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में खास चर्चा हो रही है.
योजना और आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी एन. विजयालक्ष्मी को
आईएएस एन. विजयालक्ष्मी को बिहार राज्य योजना परिषद का सचिव बनाया गया है. इसके साथ ही वे बिहार आपदा पुनर्वास सोसाइटी की परियोजना निदेशक के अतिरिक्त प्रभार में भी बनी रहेंगी. योजना और आपदा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी.
विभागीय सचिवों में बड़ा फेरबदल
आईएएस शीर्षत कपिल अशोक को पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है. के सेंथिल कुमार को गन्ना उद्योग विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है. ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी अब पंकज कुमार को सौंपी गई है. कृषि विभाग के प्रधान सचिव की कमान नर्मदेश्वर लाल को दी गई है. नगर विकास एवं आवास विभाग का दायित्व विनय कुमार को सौंपा गया है.
प्रमंडलों में नए आयुक्तों की तैनाती
प्रमंडलीय स्तर पर भी अहम बदलाव किए गए हैं. प्रेम सिंह मीणा को मुंगेर प्रमंडल का आयुक्त बनाया गया है. मनीष कुमार को सारण प्रमंडल की जिम्मेदारी सौंपी गई है. गिरिवर दयाल सिंह को तिरहुत प्रमंडल का आयुक्त बनाया गया है, जबकि अवनीश कुमार सिंह को भागलपुर प्रमंडल का आयुक्त नियुक्त किया गया है.
खेल और पर्यटन विभाग में नई जिम्मेदारियां
खेल और पर्यटन विभाग में भी नई तैनातियां हुई हैं. महेंद्र कुमार को खेल विभाग का विशेष सचिव बनाया गया है. निलेश देवरे को पर्यटन विभाग का विशेष सचिव नियुक्त किया गया है. अमित कुमार पांडेय को बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. आरिफ अहसन को खेल विभाग के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
संजीव हंस पर वित्तीय अनियमितता के आरोप
संजीव हंस पर ऊर्जा विभाग में प्रधान सचिव रहते हुए प्रीपेड स्मार्ट मीटर टेंडर से जुड़े घूस और वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे थे. इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने जांच की और अक्टूबर 2024 में उन्हें गिरफ्तार किया गया. वे लगभग एक वर्ष तक पटना की बेऊर जेल में न्यायिक हिरासत में रहे. केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद उनका निलंबन प्रभावी हुआ था.
हाई कोर्ट से जमानत के बाद प्रशासन में वापसी
अक्टूबर 2025 में पटना हाई कोर्ट ने संजीव हंस को सशर्त जमानत दी. अदालत ने उन्हें देश से बाहर न जाने और नियमित रूप से सुनवाई में उपस्थित रहने की शर्त रखी. बचाव पक्ष के अनुसार अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में कमजोरियां पाई गईं. इसके बाद राज्य सरकार ने उनका निलंबन समाप्त कर दिया और नई जिम्मेदारी सौंपी गई.
सरकार के लिए प्रशासनिक पकड़ मजबूत करना जरुरी
बिहार में आईएएस अधिकारियों की इस नई सूची से साफ है कि सरकार प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने के मूड में है. संजीव हंस की वापसी यह संकेत देती है कि कानूनी प्रक्रिया के बाद सरकार अधिकारियों को दोबारा जिम्मेदारी देने से पीछे नहीं हट रही. वहीं कई अहम विभागों और प्रमंडलों में नए चेहरों की तैनाती से नीति निर्माण और क्रियान्वयन में नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं.