सिस्टम को और प्रभावी
समीक्षा बैठक के दौरान डीजी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने विभिन्न ऑपरेशनल यूनिट्स के वरिष्ठ अधिकारियों से फीडबैक लिया और जंगल, पहाड़ी व दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों की चुनौतियों को समझा। उन्होंने खुफिया सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान, आधुनिक तकनीक के उपयोग, ड्रोन व सर्विलांस सिस्टम को और प्रभावी बनाने तथा राज्य पुलिस के साथ समन्वित अभियानों पर विशेष जोर दिया।
CRPF का शीर्ष नेतृत्व हर स्तर पर उनके साथ खड़ा
डीजी ने फील्ड में तैनात जवानों से सीधे संवाद कर उनकी बहादुरी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में डटे जवान ही देश की आंतरिक सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी हैं। इस अवसर पर उन्होंने जवानों का मनोबल बढ़ाते हुए भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार और CRPF का शीर्ष नेतृत्व हर स्तर पर उनके साथ खड़ा है।
नक्सलियों की जड़ें कमजोर
इसके साथ ही, बैठक में जवानों की सुरक्षा, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सुविधाओं, बेहतर लॉजिस्टिक्स और कल्याणकारी योजनाओं पर भी चर्चा की गई, ताकि लंबे समय तक चलने वाले अभियानों में उनकी कार्यक्षमता बनी रहे। डीजी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऑपरेशनों के दौरान स्थानीय ग्रामीणों का विश्वास जीतना प्राथमिकता हो, ताकि नक्सलियों की जड़ें कमजोर की जा सकें।
एक महत्वपूर्ण कदम
CRPF प्रमुख की यह समीक्षा यात्रा झारखंड में नक्सल विरोधी अभियानों को और धार देने, सुरक्षा बलों के आत्मविश्वास को मजबूत करने तथा क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।