National Politics: कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर पार्टी की अहम बैठक से दूर रहे. शुक्रवार को लोकसभा सांसदों की बुलाई गई बैठक में उनकी गैरमौजूदगी ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है. यह लगातार तीसरी बार है जब वह पार्टी की किसी महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक में शामिल नहीं हुए हैं. हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उनकी सार्वजनिक सराहना को देखते हुए कांग्रेस का असहज होना स्वाभाविक माना जा रहा है.
बैठक के दौरान थरूर कोलकाता में थे
राहुल गांधी ने संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिनों की रणनीति पर चर्चा के लिए कांग्रेस के सभी 99 लोकसभा सांसदों को बैठक में बुलाया था. इसी दौरान शशि थरूर का बैठक से दूर रहना कयासों को और गहरा कर रहा है. थरूर ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी थी कि वह कोलकाता में एक सहयोगी की शादी और अपनी बहन के जन्मदिन के सिलसिले में शहर से बाहर हैं. इसी कारण उनकी मौजूदगी संभव नहीं हो सकी.
बैठक में मनीष तिवारी भी अनुपस्थित रहे. दोनों नेताओं के रुख को लेकर पार्टी के भीतर लगातार चर्चा चल रही है. इससे पहले नवंबर में होने वाली दो बैठकों में भी थरूर नहीं पहुंचे थे. इनमें से एक बैठक सोनिया गांधी ने बुलाई थी. उस समय थरूर ने सफाई दी थी कि वह विमान में थे और दिल्ली लौट रहे थे. उनके कार्यालय ने यह भी बताया था कि वह अपनी मां के साथ लौट रहे थे और फ्लाइट रीशेड्यूल होने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो पाए.
18 नवंबर को SIR की बैठक
18 नवंबर को विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर पर हुई बैठक में भी वह अनुपस्थित रहे थे. तब उनके कार्यालय ने बताया था कि वह अस्वस्थ होने के कारण हिस्सा नहीं ले पाए. लगातार गैरमौजूदगी और केंद्र की नीतियों पर उनकी हालिया बयानबाजी ने ही राजनीतिक गलियारों में उनकी भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं.
तीन महत्वपूर्ण बैठकों से दूरी बनाना उनकी पार्टी लाइन से अलग होना?
शशि थरूर का लगातार तीन महत्वपूर्ण बैठकों से दूरी बनाना उनकी पार्टी लाइन से अलग खड़े होने की ओर इशारा करता है. कांग्रेस नेतृत्व उनके हालिया रुख से असहज दिख रहा है, जबकि बीजेपी के प्रति उनकी नरम टिप्पणियां नई राजनीतिक संभावनाओं की ओर संकेत कर रही हैं. हालांकि थरूर इसे महज संयोग बताते रहे हैं, लेकिन उनकी ताजा गतिविधियों ने पार्टी के भीतर असमंजस और अटकलों को और बढ़ा दिया है.