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  • 2025-12-04

Jharkhand News: राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला की रिपोर्ट- देवघर में पेड़ा और खोवा में 15 प्रतिशत तक मिट्टी मिली

Jharkhand News: देवघर श्रावणी मेले में प्रसाद के रूप में बेचे गए पेड़ा और खोवा की गुणवत्ता को लेकर इस वर्ष गंभीर खुलासा हुआ है. रांची स्थित राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि जब्त किए गए पेड़ा सैंपलों में मिट्टी की भारी मिलावट पाई गई है. खाद्य सुरक्षा विभाग ने जुलाई में मेले के दौरान अभियान चलाकर एक दर्जन से अधिक दुकानों से 69 सैंपल इकट्ठे किए थे. इन सैंपलों की जांच रिपोर्ट नवंबर में आई, जिसमें बताया गया कि 100 ग्राम पेड़ा में 15 प्रतिशत तक मिट्टी मिली हुई थी. विभाग के अधिकारियों के अनुसार पहली बार पेड़ा में मिट्टी की मिलावट सामने आई है. इससे पहले अधिकतर मामलों में सिंथेटिक खोवा की मिलावट पाई जाती थी.

जांच रिपोर्ट के बाद विभाग दोषी दुकानदारों पर कार्रवाई की तैयारी में है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की मिलावट से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है और इससे पेट से जुड़ी कई बीमारियों का खतरा बढ़ता है. जांच से यह भी सामने आया कि मिट्टी की मिलावट सुनियोजित तरीके से की गई थी. श्रावणी मेले से पहले हर साल मिलावटी खोवा तैयार करने का एक नेटवर्क सक्रिय हो जाता है. बिहार और यूपी के कई कारोबारी पाउडर दूध और लोथ की बड़ी खेप मंगवाते हैं. पाउडर दूध और लोथ को मिलाकर मशीन से खोवा तैयार किया जाता है. लो ग्रेड दूध के एक किलो पाउडर से दो से ढाई किलो तक खोवा तैयार हो जाता है. जैसे-जैसे मेला करीब आता है, यही खोवा चीनी मिलाकर पेड़ा बनाने में उपयोग होता है.

खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अनुसार पेड़ा शुद्ध देशी खोवा और चीनी से बनाया जाना चाहिए. लेकिन मिलावट करने वाले दुकानदार प्रति किलो 100 से 150 रुपये तक बचा लेते हैं. यही वजह है कि हर वर्ष मेले में मिलावटी खोवा और पेड़ा की शिकायतें आती हैं. इस बार मिट्टी की मिलावट सामने आने से विभाग और आम श्रद्धालुओं की चिंता और बढ़ गई है.

श्रावणी मेले में मिलावटी पेड़ा मिलने की घटना केवल खाद्य सुरक्षा की चूक नहीं है बल्कि यह एक संगठित फूड फ्रॉड का संकेत है. पांच महीने की जांच प्रक्रिया भी इस बात को दर्शाती है कि निगरानी व्यवस्था कितनी धीमी है. मिट्टी की मिलावट का सामने आना बताता है कि मिलावटखोर अब गुणवत्ता की परवाह किए बिना धंधा बढ़ाने में लगे हैं. विभाग की कार्रवाई और सख्त निगरानी जरूरी है क्योंकि यह मामला सीधे श्रद्धालुओं की सेहत और धार्मिक आयोजन में विश्वास से जुड़ा है.
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